सांवलियाजी मंदिर चढ़ावे के उपयोग पर कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: बाहरी खर्च पर स्थाई रोक, राजनीतिक दबाव बेअसर

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चितौड़गढ़। मंडफिया की सिविल कोर्ट ने श्री सांवलियाजी मंदिर के भंडार (चढ़ावे) की राशि के दुरुपयोग पर बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। न्यायाधीश विकास कुमार की अदालत ने मंदिर बोर्ड को स्थाई निषेधाज्ञा जारी करते हुए स्पष्ट आदेश दिया है कि:
– सांवलियाजी मंदिर मंडल अधिनियम-1992 की धारा-28 के प्रावधानों के बाहर जाकर चढ़ावे की एक भी रुपए की राशि कहीं खर्च नहीं की जा सकती।
– विशेष रूप से मातृकुंडिया तीर्थ विकास के नाम पर प्रस्तावित 18 करोड़ रुपये की राशि जारी करने पर पूर्ण रोक लगा दी गई है।
– मंदिर की संपत्ति “देवस्वरूप” है, यह राज्य सरकार का खजाना नहीं है। इसका उपयोग किसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा या बाहरी परियोजनाओं के लिए नहीं हो सकता।

सात साल पुराना मुकदमा जीता भक्तों ने
वर्ष 2018 में स्थानीय भक्तों मदन जैन, कैलाशचंद्र डाड, श्रवण तिवारी, शीतल डाड आदि ने अधिवक्ता उमेश आगर के माध्यम से मुकदमा दायर किया था। याचिका में कहा गया था कि-
– मंदिर में हर महीने करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है।
– लेकिन मंदिर परिसर और आसपास के गांवों में मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं – निशुल्क भोजनशाला, पार्किंग, शौचालय, पेयजल, चिकित्सा सुविधा, अस्पताल, स्कूल, लाइब्रेरी आदि नहीं हैं।
– इसके बावजूद मंदिर बोर्ड राजनीतिक दबाव में आकर चढ़ावे की राशि बाहरी क्षेत्रों में खर्च कर रहा है।
कोर्ट ने सभी तथ्यों की जांच-पड़ताल के बाद याचिका को स्वीकार कर लिया और अंतिम फैसला सुनाया।

कोर्ट के 5 प्रमुख बिंदु
1. सांवलियाजी मंदिर की संपत्ति देवता की संपत्ति है, सरकार की नहीं।
2. इसका उपयोग केवल मंदिर, भक्तों की सुविधा और धार्मिक कार्यों के लिए ही हो सकता है।
3. धारा-28 के बाहर खर्च करना गैर-कानूनी और आपराधिक कृत्य है।
4. ऐसा करने पर संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
5. अदालत की अवमानना का केस दर्ज हो सकेगा।

गौशालाओं को भी नहीं मिल सकेगा अनुदान
हाल ही में जिले की कई गोशालाओं ने भी सांवलियाजी भंडार से अनुदान मांगा था और ज्ञापन दिए थे। अब इस फैसले के बाद गोशालाओं सहित कोई भी बाहरी संस्था या परियोजना मंदिर के चढ़ावे से एक पैसा भी नहीं ले सकेगी।
स्थानीय भक्तों और याचिकाकर्ताओं ने इस फैसले को “ऐतिहासिक जीत” बताया है और कहा है कि अब चढ़ावा वास्तव में भक्तों और मंदिर की भलाई में ही लगेगा, न कि राजनीतिक स्वार्थ में।

Yogesh Porwal
Author: Yogesh Porwal

वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।

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