अस्पताल नहीं पहुंचे चिकित्सक की हाजिरी लगाने के आरोप, विधायक से उच्चस्तरीय जांच की मांग
मंदसौर। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में चिकित्सकों की उपस्थिति को लेकर शामगढ़ क्षेत्र से गंभीर मामला सामने आया हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परासली तीर्थ में पदस्थ चिकित्सक डॉ.नमन व्यास के लंबे समय से अस्पताल में उपस्थित नहीं रहने के बावजूद रिकॉर्ड में उनकी हाजिरी दर्ज किए जाने का आरोप लगा है। मामले में स्थानीय नागरिकों एवं प्रबुद्धजनों ने हाजिरी रजिस्टर, अवकाश आवेदन, वेतन रिकॉर्ड और उच्च कार्यालय को भेजी गई अटेंडेंस की जांच कराकर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

करीब डेढ़ माह से अनुपस्थित रहने का दावा
प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ.नमन व्यास पिछले करीब डेढ़ माह से अस्पताल में ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। इसके बावजूद उनकी उपस्थिति दर्ज होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि बीएमओ कार्यालय से सीएमएचओ कार्यालय को भेजी गई अटेंडेंस में भी चिकित्सक को उपस्थित दर्शाया गया।
जानकारी के मुताबिक 16 जून से 30 जून तक की अवधि में डॉ.व्यास की उपस्थिति दर्ज होने की बात सामने आई है। वहीं, इसके बाद 19 अगस्त तक उनके लगातार अनुपस्थित रहने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि 16 जून से 15 जुलाई 2026 तक सीएमएचओ कार्यालय को भेजी गई अटेंडेंस में उन्हें पूर्ण रूप से उपस्थित बताया गया।
हाजिरी रजिस्टर और भेजी गई अटेंडेंस में अंतर का आरोप
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि चिकित्सक वास्तव में ड्यूटी पर उपस्थित नहीं थे तो उनकी हाजिरी किसके स्तर से दर्ज की गई? साथ ही बीएमओ कार्यालय से सीएमएचओ कार्यालय को भेजी गई अटेंडेंस किस आधार पर प्रमाणित की गई?
यदि दोनों रिकॉर्ड में अंतर पाया जाता है तो यह विभागीय स्तर पर गंभीर अनियमितता का विषय हो सकता है। इसलिए पूरे मामले में दस्तावेजों का मिलान कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की जा रही है।
चिकित्सक ने बताई अवकाश पर रहने की वजह
मामले को लेकर डॉ.नमन व्यास का कहना है कि वे करीब एक से डेढ़ माह से अवकाश पर हैं। उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी परेशानी और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते छुट्टी पर रहने तथा अवकाश का आवेदन दिए जाने की बात कही है। वहीं, उन्होंने पीजी की पढ़ाई करने संबंधी आरोप से भी इनकार किया है।
ऐसे में जांच का महत्वपूर्ण बिंदु यह होगा कि चिकित्सक द्वारा अवकाश आवेदन कब और किस अधिकारी को दिया गया था, उसे स्वीकृति मिली थी या नहीं और विभागीय रिकॉर्ड में उनकी उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की गई।
वेतन भुगतान पर भी उठ सकते हैं सवाल
यदि जांच में यह साबित होता है कि चिकित्सक बिना ड्यूटी पर उपस्थित हुए भी रिकॉर्ड में उपस्थित दर्शाए गए, तो मामला केवल हाजिरी में अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा। ऐसी स्थिति में अनुपस्थिति की अवधि में वेतन भुगतान हुआ या नहीं और यदि हुआ तो किस आधार पर हुआ, इसकी भी जांच आवश्यक होगी।
ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में संचालित सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति सीधे तौर पर आम लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी है। ऐसे में उपस्थिति संबंधी किसी भी गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच जरूरी मानी जा रही है।
विधायक से उच्चस्तरीय जांच की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय नागरिकों एवं प्रबुद्धजनों ने शामगढ़ क्षेत्र के विधायक एवं रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष हरदीप सिंह डंग से हस्तक्षेप की मांग की है। मांग की गई है कि संबंधित अधिकारियों को निर्देश देकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
जांच में विशेष रूप से यह स्पष्ट किए जाने की मांग है कि संबंधित अवधि में चिकित्सक की वास्तविक उपस्थिति क्या थी, अवकाश आवेदन कब दिया गया, हाजिरी किस अधिकारी या कर्मचारी ने दर्ज की तथा सीएमएचओ कार्यालय को भेजी गई अटेंडेंस को किस स्तर से प्रमाणित किया गया।
पहले भी सामने आ चुका है स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा मामला
गौरतलब है कि क्षेत्रीय विधायक हरदीप सिंह डंग की शिकायत के बाद हाल ही में स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों से संबंधित कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया था। जांच के बाद तत्कालीन सीएमएचओ डॉ.गोविंद सिंह चौहान के निलंबन की कार्रवाई की गई थी।
अब शामगढ़ स्वास्थ्य विभाग से जुड़े हाजिरी के इस नए आरोप ने एक बार फिर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि डॉ.नमन व्यास की वास्तविक उपस्थिति, अवकाश की स्थिति और हाजिरी में कथित अनियमितता की पुष्टि विभागीय जांच एवं संबंधित रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।








