लोकायुक्त कार्रवाई के बाद भी नहीं थमा कथित वसूली का खेल, सीमांकन-बंटवारा और नामांतरण के नाम पर पैसे मांगने का आरोप
मंदसौर। जिले की सुवासरा तहसील में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कुछ पटवारी अपने स्थान पर निजी एवं अनधिकृत लोगों को एवजी कर्मचारी के रूप में रखकर सीमांकन, बंटवारा, नामांतरण सहित राजस्व संबंधी कार्यों के लिए किसानों से अवैध रूप से राशि की मांग और वसूली करवा रहे हैं। मामले को लेकर तहसीलदार सुवासरा को लिखित आवेदन सौंपकर कार्रवाई की मांग की गई है।

आवेदनकर्ताओं का आरोप है कि इस वर्ष फरवरी माह में लोकायुक्त दल द्वारा सुवासरा तहसील कार्यालय में धलपत पटवारी हरीश पाटीदार को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े जाने की कार्रवाई के बाद भी राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। आरोप है कि इसके बाद रिश्वतखोरी के लिए नया तरीका अपनाते हुए कई पटवारियों ने अपने कामकाज के लिए निजी सहायकों (पीए) को लगा रखा है।

शिकायत के अनुसार, ये निजी सहायक पटवारियों के नाम पर किसानों और आवेदकों से सीमांकन, बंटवारा, नामांतरण सहित अन्य राजस्व कार्यों के लिए पैसों की मांग करते हैं। आरोप है कि तहसीलदार द्वारा संबंधित कार्य के आदेश जारी किए जाने के बाद आवेदकों से इन निजी सहायकों द्वारा राशि की मांग की जाती है और वसूली गई रकम संबंधित पटवारियों तक पहुंचाई जाती है।
तहसीलदार को सौंपा आवेदन
मामले को लेकर बालमुकुंद, सुरेश, दीपक परमार सहित अन्य स्थानीय लोगों ने तहसीलदार सुवासरा को लिखित आवेदन सौंपा है। आवेदन की प्रतिलिपि एसडीएम सीतामऊ एवं मंदसौर कलेक्टर को भी भेजकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।
आवेदनकर्ताओं ने मांग की है कि राजस्व विभाग के कार्यों में अनधिकृत रूप से दखल देने वाले निजी व्यक्तियों को तत्काल हटाया जाए तथा पटवारियों के नाम पर अवैध वसूली करने वालों और संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका की जांच कर नियमों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
Author: Dashpur Disha
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