भ्रष्टाचार,आर्थिक अनियमितता और लापरवाही के आरोप जांच में सही पाए जाने पर संभागायुक्त ने सीएमएचओ डॉ.गोविंदसिंह चौहान को किया निलंबित, भतीजे की भूमिका भी से उठा पर्दा

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जनप्रतिनिधियों की शिकायतें और जांच रिपोर्ट बनी कार्रवाई का आधार, व्यवस्था तक डॉ.आर.के.द्विवेदी को सौंपी कमान

दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
मंदसौर। जिले के स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से चल रहे विवादों के बीच उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.गोविंदसिंह चौहान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जांच में भ्रष्टाचार, आर्थिक अनियमितता, नियमों के विरुद्ध कार्य, विभागीय लापरवाही और स्वेच्छाचारिता के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कलेक्टर कार्यालय, मंदसौर रहेगा। वहीं नई नियुक्ति होने तक जिला चिकित्सालय के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ.आर.के. द्विवेदी को सीएमएचओ का प्रभार सौंपा गया है।

कलेक्टर की जांच रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई
संभागायुक्त द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मंदसौर कलेक्टर अदिति गर्ग ने विस्तृत प्रतिवेदन भेजकर स्वास्थ्य विभाग में गंभीर अनियमितताओं की जानकारी दी थी। प्रतिवेदन में चिकित्सा अधिकारियों एवं कर्मचारियों के नियम विरुद्ध स्थानांतरण, संलग्नीकरण, कार्य आवंटन, आर्थिक अनियमितता, भ्रष्टाचार तथा पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही के आरोपों का उल्लेख किया गया था।

जनप्रतिनिधियों और मीडिया से लगातार मिल रही थीं शिकायतें
कलेक्टर द्वारा संभागायुक्त को भेजे गए पत्र में उल्लेख है कि डॉ.चौहान की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय एवं राज्य स्तरीय समाचार पत्रों में लगातार समाचार प्रकाशित हो रहे थे। जिला पंचायत की बैठकों, दिशा समिति तथा अन्य विभागीय बैठकों में भी जनप्रतिनिधियों ने उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाए। सुवासरा विधायक हरदीपसिंह डंग ने भी आउटसोर्स भर्ती में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार की शिकायत कर जांच की मांग की थी।

जांच समिति ने दर्ज किए बयान, आपराधिक प्रकरण की अनुशंसा
शिकायतों की जांच के लिए गठित समिति ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। जांच प्रतिवेदन में डॉ. चौहान के विरुद्ध गंभीर लापरवाही और आर्थिक अनियमितता पाए जाने पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की अनुशंसा भी की गई है। इसके बाद संभागायुक्त ने निलंबन का आदेश जारी किया।

जांच में सामने आईं प्रमुख अनियमितताएं
सक्षम अनुमति और कार्यादेश के बिना कर्मचारियों को वेतन भुगतान।
आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती के लिए टेंडर प्रक्रिया को दो वर्ष तक जानबूझकर लंबित रखना। पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट से संबंधित अभिलेख जांच दल के समक्ष प्रस्तुत नहीं करना। निजी नर्सिंग होम एवं अस्पतालों की अनुमति और निरीक्षण से जुड़े रिकॉर्ड संदिग्ध पाए जाना। सीएमएचओ एवं उनके भतीजे की भूमिका भ्रष्टाचार के मामलों में संदिग्ध पाई जाना।

इन मामलों की भी अलग-अलग जांच जारी
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अन्य मामलों में भी जांच जारी है। इनमें शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय की 57 छात्राओं के भोजन भुगतान में कथित अवैध जीएसटी कटौती का मामला विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त, उज्जैन में जांचाधीन है।
इसके अलावा कर्मचारियों के ईपीएफ, ईएसआईसी, न्यूनतम वेतन भुगतान में अनियमितता, लोकसेवा गारंटी अधिनियम के तहत समय-सीमा में आवेदनों का निराकरण नहीं करना तथा सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के संतोषजनक निराकरण में लापरवाही जैसे मामलों की भी जांच चल रही है।

डॉ.आर.के.द्विवेदी संभालेंगे जिम्मेदारी
संभागायुक्त के आदेश के अनुसार, शासन द्वारा नई नियुक्ति या अगली व्यवस्था होने तक जिला चिकित्सालय के नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ डॉ. आर.के. द्विवेदी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का दायित्व संभालेंगे।

Yogesh Porwal
Author: Yogesh Porwal

वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।

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