✍️दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
मन्दसौर। मध्यप्रदेश विधानसभा के आगामी सत्र में कल प्रश्नकाल में पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा होने जा रही है। मंदसौर से कांग्रेस विधायक विपिन जैन ने इस मुद्दे पर विधानसभा में प्रश्न लगाया है, जिसे प्रश्न संख्या 9 पर सूचीबद्ध किया गया है। कल विधायक सदन में अपना पक्ष रखेंगे और राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब मांगेंगे कि मध्यप्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून कब तक लागू किया जाएगा।

विधानसभा में मन्दसौर विधायक विपिन जैन द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में सरकार ने बताया था कि सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन, भोपाल दिनांक 20/09/2023 को पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने के संबंध में एक समिति का गठन किया गया था। जिसमें अपर मुख्य सचिव मध्य प्रदेश शासन गृह विभाग, प्रमुख सचिव मध्य प्रदेश शासन विधि विधायक कार्य विभाग, सचिव मध्य प्रदेश शासन जनसंपर्क विभाग, नामांकित प्रतिनिधि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल एवं शासन द्वारा नामांकित वरिष्ठ पत्रकार को शामिल किया गया था।
इसके बाद इस समिति की बैठकों और की गई कार्यवाही के बारे में पूछा गया तो सरकार के पास कोई जवाब नहीं था। जानकारी एकत्रित करने का रटा रटाया जवाब दे दिया गया। विधायक श्री जैन का मानना है कि सरकार पत्रकारों की सुरक्षा व्यवस्था करने को लेकर बिल्कुल भी गम्भीर नहीं है।
पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माने जाते हैं। बिना डर और दबाव के सच सामने लाना ही उनका मूल मंत्र है। लेकिन वर्तमान समय में पत्रकारों पर हमले, धमकियां, झूठे मुकदमे और हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू होना आवश्यक है। यह कानून पत्रकारों को शारीरिक, मानसिक और कानूनी सुरक्षा प्रदान करेगा तथा उन्हें बिना भय के काम करने का अधिकार देगा।
क्यों जरूरी है यह कानून
– बढ़ते हमले रोकने के लिए- पिछले कई वर्षों में दर्जनों पत्रकारों की हत्या हो चुकी है। ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रष्टाचार, माफिया और राजनीतिक दलों की खबर करने वाले पत्रकार सबसे ज्यादा निशाने पर रहते हैं। एक अलग कानून हमले को गैर-जमानती अपराध बनाकर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
– प्रेस स्वतंत्रता की रक्षा- संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिली है। लेकिन व्यावहारिक रूप से पत्रकारों को बार-बार दबाव झेलना पड़ता है। यह कानून फास्ट-ट्रैक जांच, विशेष अदालत और क्षतिपूर्ति का प्रावधान कर स्वतंत्र पत्रकारिता को मजबूत करेगा।
– आम नागरिकों के हित में- पत्रकार जब सुरक्षित होंगे, तब भ्रष्टाचार, अन्याय और गलत नीतियों की खबर बिना रोक-टोक सामने आएगी। इससे लोकतंत्र मजबूत होगा।
– संविदा और फ्रीलांस पत्रकारों की सुरक्षा आज ज्यादातर मीडिया कर्मी संविदा पर काम करते हैं। उन्हें भी सुरक्षा कवच मिलना चाहिए।
देश में अभी केवल दो राज्यों में यह कानून लागू है
– महाराष्ट्र — 2017 में सबसे पहले ‘महाराष्ट्र मीडिया पर्सन्स एंड मीडिया इंस्टीट्यूशंस एक्ट’ पारित हुआ। हमले पर 3 साल तक की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना का प्रावधान है।
– छत्तीसगढ़ — 2023 में ‘छत्तीसगढ़ मीडियाकर्मी सुरक्षा अधिनियम’ पारित हुआ। हिंसा या धमकी पर 25 हजार रुपये तक जुर्माना और विशेष समिति का प्रावधान है।
विधायक विपिन जैन का यह सवाल मध्य प्रदेश में पत्रकारों की लंबे समय से चली आ रही मांग को सदन तक ले जाने का प्रयास है। अगर सरकार सकारात्मक रुख अपनाती है तो प्रदेश तीसरा राज्य बन सकता है जहां पत्रकारों को विशेष कानूनी सुरक्षा मिलेगी।
पत्रकार सुरक्षा कानून सिर्फ पत्रकारों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा है। जब तक हर राज्य और केंद्र में यह लागू नहीं होता, तब तक सच बोलने वाले पत्रकारों को ‘दुधारी तलवार’ पर चलना पड़ेगा। लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए यह कानून अब अनिवार्यता बन चुका है।
Author: Dashpur Disha
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