दशपुर दिशा । दीपक सोनी
रतलाम। जावरा शहर के रलराज परिसर क्षेत्र में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक को लेकर रहवासियों का गुस्सा फूट पड़ा है। महिलाओं, नाबालिग बच्चों और राहगीरों पर लगातार हो रहे हमलों से क्षेत्र में भय का माहौल बन गया है। इस गंभीर जनहित के मुद्दे को लेकर रलराज परिसर के निवासियों ने मुख्यमंत्री, नगरीय प्रशासन मंत्री, नगर पालिका अधिकारी एवं एसडीएम जावरा को ज्ञापन भेजकर तात्कालिक प्रशासनिक एवं वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया कि रलराज परिसर नगर पालिका जावरा की सीमा में आता है, जहां बीते करीब एक वर्ष से आवारा कुत्तों की संख्या असामान्य रूप से बढ़ गई है। इसके चलते महिलाओं व नाबालिग बच्चों पर जानलेवा हमले, काटने की घटनाएं, दोपहिया वाहनों का पीछा कर गिराना, साथ ही गौ माता एवं उनके बछड़ों पर हमला कर घायल करने जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इससे क्षेत्र में सार्वजनिक शांति, लोक व्यवस्था और नागरिकों के जीवन के मौलिक अधिकार (भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21) का गंभीर उल्लंघन हो रहा है।
रहवासियों का आरोप है कि रलराज परिसर में एक ही स्थान पर कई बार सामूहिक रूप से आवारा कुत्तों द्वारा महिलाओं और बच्चों पर हमला किया गया, जिसमें पीड़ितों को गंभीर चोटें आईं तथा वाहनों को भी नुकसान पहुंचा। बावजूद इसके अब तक कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई प्रभावी प्रशासनिक हस्तक्षेप नहीं किया गया।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि रलराज परिसर निवासी मनीष धारीवाल एवं उनके परिवारजनों द्वारा बिना किसी वैधानिक अनुमति और प्रशासनिक नियंत्रण के आवारा कुत्तों को नियमित रूप से संरक्षण दिया जा रहा है तथा मांस-मटन उपलब्ध कराया जा रहा है। इस गैर-जिम्मेदाराना आचरण से कुत्तों की आक्रामकता और संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और गौवंश की जान को सीधा खतरा उत्पन्न हो गया है।
रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि
आवारा कुत्तों से संबंधित सभी घटनाओं की तात्कालिक प्रशासनिक जांच कराई जाए। नगर निकाय एवं पशुपालन विभाग को निर्देशित कर कुत्तों को पकड़कर नियमानुसार नसबंदी, टीकाकरण एवं पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अवैध एवं गैर-कानूनी संरक्षण देने वालों पर नियमानुसार प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाए।
महिलाओं, नाबालिग बच्चों एवं कोचिंग संस्थानों में आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु पुलिस, नगर निकाय एवं संबंधित विभागों को संयुक्त कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं।
ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि भविष्य में आवारा कुत्तों द्वारा कोई गंभीर या जानलेवा घटना होती है तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन एवं गैर-जिम्मेदाराना संरक्षण देने वाले व्यक्तियों की होगी। साथ ही, समस्या के समाधान नहीं होने पर रहवासी आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी भी प्रशासन की होगी।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर जनसुरक्षा के मुद्दे पर कितनी शीघ्रता और सख्ती से कार्रवाई करता है।
Author: Dashpur Disha
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