शिकायत को जनहित याचिका के रूप में दर्ज कर मांगा जवाब
मंदसौर। जिले में एक छेड़खानी पीड़िता के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। यह मामला शहर कोतवाली मंदसौर द्वारा कथित तौर पर प्रभाव में आकर मुख्य धाराओं को हटाने, बिना उचित जांच के पीड़िता और उसके पति को सह-अभियुक्त बनाने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम स्थानीय पुलिस प्रशासन की कथित तानाशाही के खिलाफ महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पीड़िता और उसके पति पिछले 13 महीनों से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस दौरान उन्होंने लगभग 295 पत्र विभिन्न उच्च अधिकारियों और संस्थाओं को लिखे, जिसमें सभी आवश्यक दस्तावेज संलग्न किए गए। इनमें मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, राष्ट्रपति कार्यालय, राज्यपाल कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय, केंद्रीय एवं राज्य गृह मंत्रालय, अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (जेनेवा), राष्ट्रीय एवं राज्य मानव अधिकार आयोग, राष्ट्रीय एवं राज्य महिला आयोग, गृह सचिव, मुख्य सचिव, डीजीपी से लेकर स्थानीय सीएसपी, कलेक्टर और आयुक्त कार्यालय शामिल हैं।
हालांकि, इन शिकायतों के अधिकांश निराकरण में पुलिस प्रशासन द्वारा अवहेलना की गई और पीड़िता को कहीं न्याय नहीं मिला।
इस मुद्दे को सबसे पहले कुछ स्थानीय एवं क्षेत्रीय समाचार पत्रों ने 28 अगस्त 2025 को प्रमुखता से उठाया। इसके बाद 16 दिसंबर 2025 को भी कुछ अखबारों ने इसे प्राथमिकता दी और पुलिस अधीक्षक का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की। इन प्रयासों के बावजूद, न तो किसी जनप्रतिनिधि ने पीड़िता का साथ दिया और न ही पुलिस अधिकारियों ने उचित सुनवाई की।
पीड़िता और उसके पति की लगातार संघर्ष और हार न मानने की भावना का परिणाम है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को स्वयं इस मामले का स्वत: संज्ञान लेना पड़ा। यह कदम न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में उम्मीद जगाता है, बल्कि पुलिस प्रशासन में सुधार की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। मामले की आगे की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
Author: Dashpur Disha
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