भानपुरा पीठ के शंकराचार्य ने कोर्ट में दायर की याचिका: मठ की जमीन पर फर्जी रजिस्ट्री और हथियाने का आरोप, जान को खतरा बताया

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मंदसौर। ज्योतिर्मठ की अवांतर भानपुरा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ महाराज ने शुक्रवार को सिविल कोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने पीठ की करीब ढाई हेक्टेयर कृषि भूमि पर जालसाजी से फर्जी रजिस्ट्री कराने और उसे हथियाने का गंभीर आरोप लगाया। यह पहली बार है जब ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वयं कोर्ट पहुंचे हों। शंकराचार्य ने अपनी जान को भी खतरा बताया और सुरक्षा की मांग की।

याचिका में कहा गया है कि 1998 में ब्रह्मलीन हो चुके स्वामी सुंदरानंद तीर्थ के नाम को कागजों में ‘जिंदा’ दिखाकर फर्जी साधु केशवाश्रम उर्फ केशवानंद जिला लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश ने भूमि की रजिस्ट्री कराई। भू-दलालों, स्थानीय लोगों और गवाहों की मिलीभगत से यह धोखाधड़ी की गई। बाद में यह जमीन कारोबारियों, शिक्षण समिति और अन्य लोगों के नाम ट्रांसफर कर दी गई। आरोप है कि रिकॉर्ड में दर्ज कृषि भूमि पर माफियाओं ने स्कूल का निर्माण भी कर लिया।

शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ अधिवक्ता महेश भटनागर और ऐश्वर्य भटनागर के साथ कोर्ट पहुंचे। बार एसोसिएशन अध्यक्ष सहित 12 से अधिक अधिवक्ताओं ने उनका साथ दिया। उन्होंने न्यायाधीश से मांग की कि फर्जी दस्तावेज रद्द किए जाएं और मठ को जमीन का कब्जा वापस दिलाया जाए। याचिका में प्रशासन और राजस्व-पंजीयन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए।

सात प्रतिवादी बनाए गए पक्षकार
याचिका में सात लोगों को प्रतिवादी बनाया गया है, जिनमें –
– गोविंद प्रसाद पुत्र बृजनंदन उपाध्याय (भानपुरा निवासी)
– श्रीनाथ पुत्र गोविंद उपाध्याय
– राधेश्याम पुत्र कंवरलाल गुर्जर
– दीपिका पति सुमेर नाहर (धानमंडी नाकोड़ा बलराम मंदिर समिति अध्यक्ष)
– सुमेर पुत्र सिरेमल नाहर (समिति सचिव)
– केशवाश्रम उर्फ केशवानंद (लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश)
– कलेक्टर मंदसौर

जान को खतरा और प्रशासन पर आरोप
कोर्ट परिसर के बाहर प्रेस वार्ता में शंकराचार्य ने कहा कि धर्मपीठ की रक्षा के लिए न्यायालय का सहारा लिया गया है। सत्य की जीत होगी। उन्होंने बताया कि इस मामले की शिकायत पुलिस, विधायक, सांसद, एसपी और कलेक्टर से कई बार की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कई बार जान से मारने की कोशिशें हुईं, फिर भी सुरक्षा नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन के कुछ लोग धर्म व राष्ट्र के खिलाफ काम कर रहे हैं। एक पूर्व थाना प्रभारी अवनीश श्रीवास्तव का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने नौकरी जाने का हवाला देकर शिकायत रद्द करवाने के लिए ओटीपी लिया, लेकिन कार्रवाई नहीं की। इसके साथ ही विधायक को लेकर कहा बहुत मामला खराब है चंदरसिंह का, बहुत खराब है। मिलते जुलते रहते है,उनको कहते रहते है – काम कर लो प्यारे, हा, हा करते है। मना भी नहीं और काम भी नहीं।

पूर्व मंत्री ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग
मामला सामने आने के बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री सुभाष कुमार सोजतिया ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ को पर्याप्त सुरक्षा दी जाए और आरोपों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व शंकराचार्य दिव्यानंद तीर्थ को मध्य प्रदेश सरकार ने सुरक्षा प्रदान की थी और कई राज्यों में राजकीय अतिथि का दर्जा दिया था। वर्तमान शंकराचार्य बनने के बाद सुरक्षा हटा ली गई, जिसके कारण पिछले कुछ वर्षों में उन पर हमले हो चुके हैं। पीठ से जुड़े लोगों ने बार-बार सुरक्षा की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

Yogesh Porwal
Author: Yogesh Porwal

वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।

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