मालवा के महान संत श्री श्री 1008 मंगलदास जी महाराज के देवलोकगमन पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर उनकी स्मृति में भंडारे का हुआ आयोजन

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दशपुर दिशा । दीपक सोनी
जावरा। मालवा की माटी के महान संत श्री श्री 1008 मंगलदास जी महाराज के देवलोकगमन पर शनिवार को अरनियापिथा कृषि उपज मंडी परिसर में सर्व हिंदू समाज द्वारा एक विशाल श्रद्धांजलि सभा और भंडारे का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर हजारों भक्तों ने गुरुदेव की स्मृति में महाप्रसादी ग्रहण की और उनके दिखाए सन्मार्ग पर चलने की शपथ ली।

संत मंगलदास जी का पवित्र जीवन
14 अगस्त 2025 को प्रातः 6 बजे मंगल आरती के पश्चात रूपनगर आश्रम, जावरा (जिला रतलाम) में संत श्री श्री 1008 मंगलदास जी महाराज ब्रह्मलीन हो गए। मात्र 11 वर्ष की आयु में घर त्यागकर ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए उन्होंने श्री हनुमान जी की कठिन साधना की। अपने 62 वर्षों के जीवन में उन्होंने अन्न का त्याग किया, लेकिन अपने आश्रम में किसी भी भक्त को भूखा नहीं जाने दिया। उनके आश्रम में हमेशा भंडारे के माध्यम से भक्तों को भोजन कराया गया।

गुरु परंपरा का निर्वहन
29 अगस्त को रूपनगर और देवरुडी आश्रम में संत श्री प्रहलाद दास जी और संत श्री विजयदास जी को गुरु परंपरा के अनुसार गद्दी समर्पित की गई। साथ ही गुरुदेव के चरण कमल समाधि पर स्थापित किए गए।

विशाल भंडारा और श्रद्धांजलि सभा
30 अगस्त को आयोजित विशाल भंडारे में 16 से अधिक जिलों से लगभग दो लाख भक्त शामिल हुए। विभिन्न अखाड़ों के संत, महंत, और महामंडलेश्वरों की उपस्थिति में यह भव्य और दिव्य आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक डॉ. राजेंद्र पाण्डेय, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की भाभी श्रीमती कलावती यादव, सांसद सुधीर गुप्ता, करनी सेना के प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर, कांग्रेस नेता वीरेंद्र सिंह सोलंकी, पूर्व विधायक जितेंद्र गहलोत, रतलाम एसपी अमित कुमार सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

विशाल व्यवस्था और भक्तों का उत्साह
महू-नीमच फोरलेन मार्ग पर भक्तों की भीड़ के कारण सड़कें खचाखच भरी रहीं। प्रशासन ने यातायात व्यवस्था के लिए 450 से अधिक कर्मचारी और 325 सामाजिक कार्यकर्ताओं को 23 चिन्हित केंद्रों पर तैनात किया। दो मुख्य पार्किंग स्थलों पर 417 कार्यकर्ताओं ने वाहन व्यवस्था संभाली। भंडारे में 235 हलवाइयों, 10 गांवों के ग्रामीणों, और 80 ट्रैक्टरों व 50 टैंकरों के साथ 1200 से अधिक भक्तों ने तीन दिन तक व्यवस्था संभाली।

भोजन वितरण और सेवा
भोजन परोसने और वितरण में 18 विद्यालयों के 440 शिक्षक-छात्र, 80 गांवों के 2015 ग्रामीण, और धार्मिक-सामाजिक संगठनों के 1000 से अधिक कार्यकर्ता सक्रिय रहे। मंडी और नगर पालिका कर्मचारियों ने भी व्यवस्था में योगदान दिया। सिंदूर सेवा समिति और जीवनदाता रक्तदान सेवा समिति ने लगभग 1008 यूनिट रक्त संकलन किया।

सेवादारों का समर्पण
400 से अधिक कार्यकर्ताओं ने कार्यालय, आपूर्ति, भोजन निर्माण, जल वितरण, विद्युत, ध्वनि, चिकित्सा, यातायात, और सुरक्षा जैसे प्रबंधन कार्यों में पांच दिन तक निरंतर सेवा की। मंदिर समिति और सेवादारों ने श्रद्धापूर्वक प्रसादी वितरित की, जिसमें महिलाओं, पुरुषों, और संतों के लिए अलग-अलग बैठने की व्यवस्था थी।

भक्तों की श्रद्धा
महू-नीमच फोरलेन पर बार-बार जाम के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। बच्चे, महिलाएं, और पुरुष सभी गुरुदेव को नमन करने और प्रसादी ग्रहण करने के लिए उत्साहित दिखे। यह आयोजन मालवा के इस महान संत के प्रति भक्तों की अटूट श्रद्धा और उनके सन्मार्ग के प्रति समर्पण का प्रतीक बना।

Dashpur Disha
Author: Dashpur Disha

दशपुर दिशा समाचार पत्र भारत के प्रेस महापंजीयक कार्यालय नई दिल्ली से पंजीकृत है। दशपुर दिशा मालवांचल में खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित समाचार पत्र है। www. dashpurdisha.com हमारी अधिकृत वेबसाइट है।

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