टकरावद (पंकज जैन)। मध्य प्रदेश के मल्हारगढ़ विकासखंड में शासन की महत्वाकांक्षी जन अभियान परिषद योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। गांवों में सामाजिक जागरूकता और जनकल्याण के लिए लाखों रुपये का बजट देने वाली इस योजना को मल्हारगढ़ में कथित रूप से लूट का जरिया बना लिया गया है। ब्लॉक समन्वयक अर्चना भट्ट और उनके पति इंद्रजीत भट्ट पर संगठित रूप से रिश्वतखोरी और उगाही के गंभीर आरोप लगे हैं। ग्राम विकास प्रस्फुरण और नवांकुर समितियों के अध्यक्षों ने खुलासा किया है कि इन दोनों ने न केवल समितियों से अवैध वसूली की, बल्कि परामर्शदाताओं को उनके मेहनताने का हिस्सा तक छीनने के लिए मजबूर किया।
40% कमीशन की लूट, घर के काम कराने का दबाव
गुड़भेली छोटी, रतनपिपलिया, काल्याखेड़ी गुजरान और चिल्लोदपिपलिया की नवांकुर समितियों के अध्यक्ष बद्रीलाल चौहान, भागीरथ पाटीदार, बालमुकुंद मालवीय और विजय बैरागी ने सनसनीखेज खुलासा किया है। इनका आरोप है कि अर्चना भट्ट और उनके पति समितियों को मिलने वाली राशि का 40% हिस्सा रिश्वत के तौर पर वसूलते हैं। इतना ही नहीं, परामर्शदाताओं को उनके मेहनताने में से भी निश्चित हिस्सा देने के लिए दबाव डाला जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़ितों पर निजी जिम और घरेलू काम कराने का भी दबाव बनाया जाता है, जिससे उनका आर्थिक और शारीरिक शोषण हो रहा है।
जनसुनवाई में शिकायत, फिर भी कार्रवाई शून्य
पीड़ित समितियों और परामर्शदाताओं ने इस गंभीर मामले को कलेक्टर के समक्ष जनसुनवाई में उठाया। शिकायत दर्ज हुए 15 दिन बीत जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे आक्रोशित पीड़ितों ने अब उपमुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने जन अभियान परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों को भी मामले से अवगत कराया है और एक विशेष जांच दल गठित करने की मांग की है।
“लीपापोती बर्दाश्त नहीं, दोषियों को सजा दो”
पीड़ितों का कहना है कि वे किसी भी तरह की लीपापोती को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उनकी मांग है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो और प्रभावशाली पदों पर बैठे दोषियों को बख्शा न जाए। उनका मानना है कि यदि इस भ्रष्टाचार को अनदेखा किया गया, तो सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे और आम जनता तक उनका लाभ पहुंचना मुश्किल हो जाएगा।
कागजी खानापूर्ति, दिखावे की खबरें
मल्हारगढ़ तहसील में लंबे समय से ग्राम प्रस्फुरण समितियों के जरिए शासन के लाखों रुपये की बंदरबांट का खेल चल रहा है। आरोप है कि औपचारिकता के लिए फोटो खींचकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, जो केवल दिखावे के लिए होते हैं। इन खबरों के पीछे की सच्चाई अब सामने आ रही है, और पीड़ितों की आवाज बुलंद हो रही है।
अब प्रशासन की बारी
सभी की निगाहें अब प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या इस सनसनीखेज भ्रष्टाचार के मामले में दोषियों पर कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? पीड़ितों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।









