50 साल पहले ड्रग्स तस्करी में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गूंज चुका है मन्दसौर का नाम, मुम्बई के डॉन हाजी मस्तान का दोस्त मन्दसौर से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर करता था अफीम सप्लाई

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मंदसौर। मंदसौर जिला लंबे समय से ड्रग्स तस्करी का गढ़ रहा है। वर्तमान में सिंथेटिक ड्रग्स (एमडी) से जुड़े मामलों ने इसे एक बार फिर देशभर की सुर्खियों में ला दिया है। लेकिन यह कोई नई बात नहीं है। करीब 50 साल पहले से ही मंदसौर अफीम और अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुख्यात रहा है। यहां की मिट्टी में जड़ें जमाए इस अपराध की कहानी मुंबई के कुख्यात डॉन हाजी मस्तान के दोस्त मोहम्मद शफी से जुड़ी हुई है, जो मंदसौर का ही निवासी था।

मोहम्मद शफी का चांद तारा ब्रांड
1975 से मोहम्मद शफी अफीम और ड्रग्स की तस्करी में सक्रिय था। वह मंदसौर के सबसे बड़े ड्रग माफिया के रूप में उभरा। शफी ने ‘चांद तारा’ नाम का एक ब्रांड विकसित किया था, जो न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी लोकप्रिय था। इस ब्रांड के तहत अफीम और अन्य ड्रग्स की बड़े पैमाने पर तस्करी की जाती थी। शफी का नेटवर्क इतना मजबूत था कि वह मुंबई के पहले डॉन हाजी मस्तान का करीबी दोस्त था, जिसने उसे तस्करी के कारोबार में मजबूती प्रदान की।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुआ खुलासा
मोहम्मद शफी की पोल सबसे पहले अमेरिका में खुली। एक अंतरराष्ट्रीय बैठक में, जहां ड्रग्स तस्करी पर रोकथाम के उपायों पर चर्चा हो रही थी, मंदसौर का नाम सामने आया। भारत की ओर से मंदसौर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (एसपी) संजय राणा ने इस बैठक में प्रतिनिधित्व किया था। बैठक के दौरान जब शफी का नाम और उसकी गतिविधियां उजागर हुईं, तो राणा स्तब्ध रह गए। यह घटना मंदसौर के लिए एक बड़ा झटका थी, क्योंकि इससे जिले की छवि वैश्विक स्तर पर प्रभावित हुई।

बैठक से लौटते ही एसपी संजय राणा ने ताबड़तोड़ अभियान शुरू किया। शफी के ठिकानों पर छापेमारी की गई और उसके नेटवर्क को ध्वस्त करने की कोशिश की गई। परिणामस्वरूप, मोहम्मद शफी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। हालांकि, पैरोल पर रिहा होने के बाद वह फरार हो गया और आज तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है। शफी की संपत्तियां और उसके तस्करी के तरीके आज भी जांच एजेंसियों के लिए एक पहेली बने हुए हैं।

कमलनाथ सरकार में फिर सुर्खियां में आया था शफी
मोहम्मद शफी का नाम दूसरी बार मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार के दौरान सुर्खियों में आया। उस समय उसके तहखाना-नुमा मकान की तस्वीरें और विवरण मीडिया में वायरल हुए, जो उसके तस्करी नेटवर्क की जटिलता को दर्शाते थे। यह घटना ने एक बार फिर साबित किया कि मंदसौर में ड्रग्स तस्करी की जड़ें कितनी गहरी हैं। वर्तमान में एमडी जैसे सिंथेटिक ड्रग्स के मामलों ने जिले को फिर से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।

मन्दसौर की यह कहानी बताती है कि ड्रग्स तस्करी एक पुरानी समस्या है, जो दशकों से चली आ रही है। जांच एजेंसियां लगातार प्रयास कर रही हैं, लेकिन फरार अपराधियों और नए रूपों में उभरते नेटवर्क चुनौती बने हुए हैं। स्थानीय प्रशासन और केंद्र सरकार को मिलकर इस पर सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि मंदसौर की छवि एक तस्करी केंद्र से हटकर विकासशील जिले की बन सके।

Dashpur Disha
Author: Dashpur Disha

दशपुर दिशा समाचार पत्र भारत के प्रेस महापंजीयक कार्यालय नई दिल्ली से पंजीकृत है। दशपुर दिशा मालवांचल में खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित समाचार पत्र है। www. dashpurdisha.com हमारी अधिकृत वेबसाइट है।

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