भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल के उस नियम को रद्द कर दिया है, जिसमें जीएनएम (जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी) और एएनएम (ऑक्जिलरी नर्सिंग एंड मिडवाइफरी) कोर्स में प्रवेश के लिए 12वीं में बायोलॉजी विषय को अनिवार्य किया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार या नर्सिंग काउंसिल, भारतीय नर्सिंग परिषद द्वारा निर्धारित योग्यता से अलग नियम नहीं बना सकती।

मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि नर्सिंग कोर्स में प्रवेश प्रक्रिया और योग्यता पूरी तरह से आईएनसी के मानकों के अनुसार होगी। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि किसी संस्थान में सीटें खाली हैं, तो उन्हें आईएनसी के नियमों के अनुरूप योग्य छात्रों से भरा जा सकता है।

मप्र काउंसिल का मनमाना नियम रद्द
मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने 2024 के प्रवेश नियमों में प्रावधान जोड़ा था कि जीएनएम कोर्स में केवल वही विद्यार्थी प्रवेश ले सकेंगे, जिन्होंने 12वीं में बायोलॉजी विषय पढ़ा हो। इस नियम के कारण आर्ट्स और कॉमर्स संकाय के विद्यार्थी नर्सिंग जैसे रोजगारोन्मुख कोर्स से वंचित हो रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने इसे शिक्षा के अधिकार और समान अवसर के सिद्धांतों के खिलाफ माना और नियम को रद्द कर दिया।

प्रवेश परीक्षा की बाध्यता भी खत्म
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में जीएनएम, एएनएम, पोस्ट बेसिक और एमएससी नर्सिंग कोर्स में प्रवेश परीक्षा की अनिवार्यता को भी समाप्त कर दिया। अब प्रवेश प्रक्रिया केवल आईएनसी द्वारा निर्धारित सामान्य योग्यता के आधार पर होगी।
विद्यार्थियों को मिलेगा व्यापक अवसर
इस फैसले से आर्ट्स और कॉमर्स संकाय के विद्यार्थियों को नर्सिंग कोर्स में प्रवेश का अवसर मिलेगा, जिससे उनके लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। यह निर्णय नर्सिंग शिक्षा को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Author: Dashpur Disha
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