रामपुरा न्यायालय का फैसला: एक महिला समेत पांचों दोषियों पर 500-500 रुपये का अर्थदंड, पीड़ित को मिलेगा 2500 रुपये प्रतिकर
रामपुरा। जमीन विवाद को लेकर मारपीट कर एक व्यक्ति का हाथ फ्रैक्चर करने के मामले में रामपुरा न्यायालय ने एक महिला सहित पांच आरोपियों को 2-2 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, श्रेणी न्यायालय रामपुरा श्री रौनक पाटीदार ने पांचों आरोपियों को धारा 325/34 भारतीय दंड संहिता, 1860 के तहत दोषी ठहराते हुए 500-500 रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया।

दोषी ठहराए गए आरोपियों में रामनारायण पिता नानालाल गुर्जर (67), दशरथ पिता देवराम गुर्जर (31), लालाराम पिता देवराम गुर्जर (33), दयाराम उर्फ देवराम पिता नानालाल गुर्जर (62) और केशरबाई पति गंगाराम गुर्जर (65) शामिल हैं। सभी आरोपी ग्राम भगोरी, थाना रामपुरा, जिला नीमच के निवासी हैं।
जमीन की बात को लेकर हुआ था विवाद
प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी करने वाले सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी अरविंद थापक ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि फरियादिया सुंदरबाई ने थाना रामपुरा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
रिपोर्ट के अनुसार 26 अप्रैल 2016 को शाम करीब 4:30 बजे इंदरसिंह अपने साथी कन्हैयालाल के साथ खेत पर आया था। उस समय खेत में मजदूर गोपाल एवं भेरूलाल तथा इंदरसिंह के दोनों बेटे प्रदीप और सतीश भी मौजूद थे।
इंदरसिंह अपने ट्रैक्टर से खेत की बुवाई कर रहा था। इसी दौरान आरोपीगण मौके पर पहुंचे और जमीन के विवाद को लेकर विवाद करने लगे। आरोप है कि इसके बाद आरोपियों ने कुल्हाड़ी, लकड़ी और लात-घूंसों से मारपीट शुरू कर दी।
मारपीट में गोपाल के बाएं हाथ में गंभीर चोट आई और उसका फ्रैक्चर हो गया। घटना के दौरान आसपास के खेतों में मौजूद लोगों ने मौके पर पहुंचकर बीच-बचाव किया।
फरियादिया की रिपोर्ट पर थाना रामपुरा में प्रकरण दर्ज कर पुलिस ने आवश्यक विवेचना पूरी करने के बाद अभियोग-पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
गोपाल की गवाही नहीं हो सकी, अन्य साक्ष्यों से साबित हुआ अपराध
विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से महत्वपूर्ण साक्षियों के बयान न्यायालय के समक्ष कराए गए। प्रकरण के महत्वपूर्ण साक्षी गोपाल का पता नहीं चलने के कारण उसकी गवाही न्यायालय में नहीं हो सकी। हालांकि, उसके साथ हुई मारपीट और आई गंभीर चोटों को अन्य साक्षियों की गवाही के माध्यम से प्रमाणित कराया गया।
इसके अलावा आहत इंदरसिंह द्वारा विचारण के दौरान आरोपियों के साथ राजीनामा कर लिया गया था। इसके बावजूद अभियोजन पक्ष ने महत्वपूर्ण गवाहों के बयान कराकर आरोपियों के विरुद्ध अपराध को संदेह से परे प्रमाणित किए जाने का तर्क प्रस्तुत किया और दोषियों को दंडित किए जाने की मांग की।
न्यायालय ने सुनाई 2-2 साल की सजा
मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों एवं अभियोजन के तर्कों के आधार पर न्यायालय ने पांचों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 2-2 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 500-500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
न्यायालय ने अर्थदंड की राशि में से 2500 रुपये प्रतिकर के रूप में आहत गोपाल को दिए जाने का आदेश भी पारित किया।
प्रकरण में शासन की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी अरविंद थापक ने पैरवी की।
Author: Dashpur Disha
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