दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
मंदसौर। मंदसौर के त्रिशिका नर्सिंग होम में चिकित्सकीय लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। प्रसव के दौरान ऑपरेशन में एक महिला की आंत काटे जाने का आरोप है, जिससे उसकी हालत नाजुक हो गई है। पीड़ित महिला के परिजनों ने नर्सिंग होम की संचालक डॉ. रीना नागर के खिलाफ कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
घटना का विवरण
ग्राम लिंबावास निवासी अजय बंजारा ने बताया कि उनकी पत्नी शांति बाई को गर्भावस्था के दौरान प्रसव पीड़ा होने पर 25 जुलाई 2025 को त्रिशिका नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। डॉ. रीना नागर ने ऑपरेशन किया, जिसमें शांति ने एक पुत्री को जन्म दिया। ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ने मां और बच्चे को स्वस्थ बताया। हालांकि, परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान लापरवाही से शांति की आंत काट दी गई, जिसे छिपाया गया।

27 जुलाई को शांति की तबीयत अचानक बिगड़ने पर डॉ. रीना ने उन्हें बड़े अस्पताल में दिखाने की सलाह दी। परिजन शांति को अहमदाबाद के सिविल अस्पताल ले गए, जहां 28 जुलाई से 2 अगस्त तक इलाज चला। वहां डॉक्टरों ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान आंत कटने से गंभीर संक्रमण फैल गया है और पेट में मवाद जमा हो गया है। वर्तमान स्थिति में ऑपरेशन संभव नहीं होने के कारण दवाओं से संक्रमण नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। डॉक्टरों ने बताया कि छह माह बाद ही दोबारा ऑपरेशन संभव होगा।
अहमदाबाद से लौटने के बाद शांति की हालत बिगड़ती रही। परिजन उन्हें उदयपुर के पेसिफिक अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने पुष्टि की कि आंत कटने से गहरा संक्रमण फैल चुका है और तत्काल ऑपरेशन संभव नहीं है। वर्तमान में शांति जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं। उनके मल निकासी के लिए अलग से व्यवस्था की गई है।
परिजनों का आरोप: डॉक्टर ने नहीं मानी गलती
26 अगस्त 2025 को परिजनों ने डॉ. रीना नागर से मुलाकात कर स्थिति बताई, लेकिन डॉक्टर ने अपनी गलती स्वीकार करने या माफी मांगने के बजाय परिजनों को धमकाया। परिजनों के अनुसार, डॉ. रीना ने कहा, “शांति पहले से कमजोर थी, जो करना है कर लो, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
पीड़ित अजय और उनके ससुर जगदीश चंद्र कच्छावा ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की जनसुनवाई में आवेदन देकर डॉ. रीना नागर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर न्याय नहीं मिला तो वे धरना-आंदोलन करेंगे। इस मामले में डॉ. रीना नागर से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
यह मामला न केवल एक परिवार की पीड़ा को उजागर करता है, बल्कि निजी नर्सिंग होम्स की कार्यप्रणाली और चिकित्सकीय जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाता है। परिजनों की मांग है कि दोषी डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो।
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।









