राजस्व अधिकारियों का विरोध फिर हुआ तेज, आज से हड़ताल शुरू

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मंदसौर। राजस्व विभाग में न्यायिक और गैर-न्यायिक कार्यों के कृत्रिम विभाजन को लेकर प्रदेशभर के राजस्व अधिकारियों का असंतोष एक बार फिर उभरकर सामने आया है। मंदसौर सहित सभी जिलों के राजस्व अधिकारियों ने आज से समस्त कार्यों से विरत रहने का ऐलान किया है। हालांकि, आपदा प्रबंधन कार्य इससे अप्रभावित रहेंगे।

कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
मंदसौर के राजस्व अधिकारियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें स्पष्ट की हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि जब तक विवादास्पद कार्य विभाजन योजना को पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता, तब तक अधिकारी केवल आपदा प्रबंधन कार्य करेंगे और अन्य सभी कार्यों से विरत रहेंगे। इस दौरान वे जिला मुख्यालयों पर उपस्थित रहेंगे।

क्या है विवाद का कारण
राजस्व अधिकारियों का कहना है कि विभाग द्वारा लागू किया गया न्यायिक और गैर-न्यायिक कार्यों का विभाजन कार्यों में असंतुलन पैदा कर रहा है। अधिकारियों को उनके मूल कार्यों से हटाकर कार्यपालक दंडाधिकारी की जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, जिसके लिए उनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। इससे कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

मौखिक आश्वासन के बाद भी लागू हुई योजना
अधिकारियों ने बताया कि पूर्व में राजस्व मंत्री और प्रमुख सचिव राजस्व ने आश्वासन दिया था कि यह योजना केवल 12 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू होगी और न्यायालयों का मर्जर नहीं किया जाएगा। इसके आधार पर आंदोलन स्थगित कर दिया गया था। लेकिन मंदसौर सहित 9 अन्य जिलों में योजना लागू कर दी गई, जिससे अधिकारियों में आक्रोश है।

आंदोलन के प्रमुख निर्णय
– 6 अगस्त 2025 से राजस्व अधिकारी जिला मुख्यालय पर उपस्थित रहेंगे, लेकिन सामान्य कार्यों से पूर्णतः विरत रहेंगे।
– शासकीय वाहन जमा किए जाएंगे और डिजिटल सिग्नेचर डोंगल सीलबंद कर जिला अध्यक्ष को सौंपे जाएंगे।
– अधिकारी जिले के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप से बाहर हो जाएंगे।
– प्रतिदिन शाम 6 बजे स्थापना शाखा में उपस्थिति दर्ज कराई जाएगी।

प्रशासन से मांगें
अधिकारियों ने मांग की है कि यदि कार्यपालक दंडाधिकारी की जिम्मेदारी ही विभाजन का आधार है, तो ये शक्तियां पुलिस या सामान्य प्रशासन विभाग को हस्तांतरित की जाएं। साथ ही, कार्य विभाजन योजना और मूल राजस्व कार्यों से संबंधित निर्देशों को तत्काल निरस्त किया जाए।

यह आंदोलन प्रदेशभर के राजस्व अधिकारियों की एकजुटता को दर्शाता है। यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। फिलहाल, अधिकारी अपनी मांगों पर अडिग हैं और प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।

Yogesh Porwal
Author: Yogesh Porwal

वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।

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