नकली खाद के मामले से फिर जुड़ा मंदसौर का नाम, 2021 की कार्रवाई के बाद भी अनसुलझे हैं कई सवाल

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2021 में भवानीमंडी में पकड़ी गई थी पिपलियामंडी के सुभाष अग्रवाल की नकली खाद की फैक्ट्री, भिंड में पकड़ी गई नकली खाद की सप्लाई का मंदसौर कनेक्शन सामने आने के बाद पुराने मामले की जांच पर उठे सवाल

दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल

मन्दसौर। खाद के कारोबार को लेकर मध्यप्रदेश के भिंड में हुई हालिया कार्रवाई के बाद एक बार फिर मंदसौर का नाम चर्चा में है। सामने आई जानकारी के अनुसार भिंड में पकड़ी गई नकली खाद की सप्लाई का कनेक्शन मंदसौर से जुड़ा है। इसी बीच वर्ष 2021 में राजस्थान के झालावाड़ जिले में सामने आए नकली खाद के मामले में मंदसौर जिले के पिपलियामंडी निवासी सुभाष अग्रवाल का नाम चर्चा में आने के कारण पुराने मामले की जांच और उसके बाद हुई कार्रवाई पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी व्यक्ति का नाम किसी पुराने प्रकरण में सामने आना अपने आप में उसके दोषी होने का प्रमाण नहीं है। ऐसे में वर्तमान मामले में भी वास्तविक भूमिका का निर्धारण पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों की जांच एवं दस्तावेजों के आधार पर ही हो सकता है।

2021 में राजस्थान में पकड़ी गई थी नकली खाद की फैक्ट्री
वर्ष 2021 में राजस्थान के झालावाड़ जिले के मिश्रौली थाना क्षेत्र के देवरिया गांव में पुलिस और कृषि विभाग की संयुक्त कार्रवाई में नकली खाद तैयार करने वाली फैक्ट्री पकड़ी थी।

कार्रवाई के दौरान मौके से 1201 भरे हुए कट्टे, करीब 1500 खाली कट्टे, लगभग 500 टन फ्लाईऐश/कोटा स्टोन की स्लरी, तीन ट्रक, जेसीबी, पैकिंग मशीन और इलेक्ट्रॉनिक कांटे सहित अन्य सामग्री जब्त की गई थी। मामले में पांच लोगों की गिरफ्तारी की बात भी सामने आई थी। उस समय सुभाष अग्रवाल फरार हो गया था।

अब करीब पांच वर्ष बाद जब मध्यप्रदेश के भिंड में नकली खाद का मामला सामने आया है और उसकी सप्लाई का संबंध मंदसौर से बताया जा रहा है, तब वर्ष 2021 के प्रकरण की जांच और उसके बाद की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में आ गई है।

भिंड की कार्रवाई के बाद फिर क्यों उठ रहा है मंदसौर कनेक्शन का सवाल?
भिंड में हुई कार्रवाई के बाद यदि जांच में मंदसौर से खाद की सप्लाई से जुड़े दस्तावेज या अन्य साक्ष्य सामने आए हैं, तो जांच एजेंसियों के लिए यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि उस सप्लाई चेन की पूरी कड़ी का पता लगाया जाए।
माल कहां तैयार हुआ?
कहां से खरीदा गया?
किसके नाम से बिल जारी हुए?
किस वेयरहाउस में स्टॉक रखा गया?
किस वाहन से परिवहन हुआ?
किस फर्म या डीलर के माध्यम से माल आगे भेजा गया?
इन सवालों के जवाब दस्तावेजों, बिलिंग रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, परिवहन रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और अन्य साक्ष्यों से ही सामने आ सकते हैं।

2021 के मामले में सुभाष अग्रवाल पर क्या कार्रवाई हुई?
यही वह सवाल है, जिसका जवाब अब सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है।
यदि वर्ष 2021 के राजस्थान प्रकरण में सुभाष अग्रवाल का नाम पुलिस कार्रवाई अथवा जांच में सामने आया था, तो उसके बाद मंदसौर में संबंधित विभागों द्वारा क्या कार्रवाई की गई? क्या उसके खाद कारोबार से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई? क्या उसके गोदामों और स्टॉक का सत्यापन हुआ? क्या खाद के लाइसेंस, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और परिवहन दस्तावेजों की जांच की गई?
और यदि ऐसी कोई जांच हुई थी, तो उसका निष्कर्ष क्या रहा?
यह जानकारी सार्वजनिक होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 2021 के मामले की जांच वास्तव में कितनी आगे बढ़ी थी।

क्या 2021 और 2026 के मामलों के बीच कोई कड़ी है?
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि राजस्थान में वर्ष 2021 में सामने आए मामले और वर्ष 2026 में भिंड में पकड़े गए नकली खाद प्रकरण के बीच कोई सीधा संबंध है।
लेकिन यदि दोनों मामलों में मंदसौर से जुड़े व्यक्ति, फर्म, वेयरहाउस, परिवहनकर्ता, बिल या सप्लाई चैन सामने आते हैं, तो इन पहलुओं की जांच किया जाना जरूरी है।
जांच एजेंसियां चाहें तो पुराने प्रकरण की केस डायरी, आरोपियों के बयान, जब्ती पंचनामे, बिल एवं परिवहन दस्तावेज और वर्तमान मामले में मिले दस्तावेजों का मिलान कर सकती हैं। इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि दोनों मामलों के बीच कोई वास्तविक कारोबारी कड़ी है या नहीं।

सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, पूरी सप्लाई चेन की जांच जरूरी
नकली खाद का मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं माना जा सकता। यदि वास्तव में नकली खाद की सप्लाई का नेटवर्क संचालित हुआ है तो उसमें निर्माण, पैकिंग, भंडारण, परिवहन, बिलिंग और बिक्री से जुड़े कई स्तर हो सकते हैं।

इसलिए जांच में यह भी सामने आना चाहिए कि—

– खाद किन फर्मों से खरीदी गई?
– किन फर्मों के नाम पर बिल काटे गए?
– माल किन वाहनों से परिवहन हुआ?
– किन वेयरहाउस में स्टॉक रखा गया?
– किन डीलरों या दुकानदारों तक माल पहुंचा?
– भुगतान किस माध्यम से हुआ?
– क्या किसी किसान तक नकली खाद पहुंची?
– और यदि पहुंची तो उससे किसानों को कितना नुकसान हुआ?

किसानों के लिए मामला बेहद गंभीर
नकली खाद का सबसे बड़ा नुकसान उस किसान को होता है, जो महंगे दाम पर खाद खरीदकर अपनी फसल में इस्तेमाल करता है। किसान को उम्मीद होती है कि खाद के इस्तेमाल से उसकी फसल बेहतर होगी, लेकिन यदि उत्पाद ही नकली निकले तो उसकी लागत तो बढ़ती है, साथ ही फसल पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
ऐसे में नकली खाद के मामलों में केवल कुछ बोरी जब्त कर कार्रवाई समाप्त कर देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। असली सवाल उस पूरी सप्लाई चेन तक पहुंचने का है, जहां से यह माल तैयार होकर किसानों तक पहुंचता है।

मंदसौर प्रशासन से अब इन सवालों के जवाब अपेक्षित
भिंड की हालिया कार्रवाई के बाद मंदसौर से जुड़े सप्लाई कनेक्शन की जांच के साथ वर्ष 2021 के राजस्थान प्रकरण की पृष्ठभूमि को भी सामने रखना जरूरी हो गया है।
अब देखना यह है कि संबंधित जांच एजेंसियां—
वर्ष 2021 के मामले में सुभाष अग्रवाल के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई थी?
क्या उस समय मंदसौर में उसके कारोबार या वेयरहाउस की जांच हुई थी?
क्या खाद के स्टॉक, लाइसेंस, खरीद-बिक्री और परिवहन रिकॉर्ड की जांच की गई थी?
क्या राजस्थान से मंदसौर तक कथित नकली खाद की सप्लाई का कोई रिकॉर्ड मिला था?
और क्या भिंड के वर्तमान मामले में सामने आए मंदसौर कनेक्शन की जांच पुराने राजस्थान प्रकरण के दस्तावेजों से मिलान कर की जाएगी?

Dashpur Disha
Author: Dashpur Disha

दशपुर दिशा समाचार पत्र भारत के प्रेस महापंजीयक कार्यालय नई दिल्ली से पंजीकृत है। दशपुर दिशा मालवांचल में खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित समाचार पत्र है। www. dashpurdisha.com हमारी अधिकृत वेबसाइट है।

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