मंदसौर पीजी कॉलेज प्राचार्य डॉ.जेएस दुबे पर गंभीर आरोप, सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ.एलएन शर्मा ने शासन को सौंपी शिकायत, लगाए वित्तीय अनियमितता, धोखाधड़ी और प्रताड़ना के आरोप
अपनी विवादित कार्यशैली और भाषा शैली के लिए चर्चित राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.ज्योति स्वरूप दुबे एक बार फिर विवादों के घेरे में है। बात चाहे विधायक के प्रोटोकॉल उल्लंघन की हो, आरटीआई एक्ट के उल्लंघन की हो या फिर कॉलेज ग्राउंड को लेकर पटाखा व्यापारियों से अड़ीबाज़ी की हो पूरे शहर ने प्राचार्य डॉ.दुबे का व्यवहार देखा है। जो शिकायत इनके विरूद्ध हुई है उससे ये स्पष्ट है कि इनका व्यवहार वर्षों पहले भी ऐसा ही था। जिसके कारण इन्हें मन्दसौर से अन्यत्र रवानगी दी गई थी। डॉ.दुबे पर लगे आरोपों में कितनी सच्चाई है ये तो फिलहाल भविष्य के गर्भ में है लेकिन शिकायती पत्र को पढ़ने के बाद दशपुर दिशा की इन्वेस्टिगेशन टीम को कई तथ्य ऐसे हाथ लगे है जो शासन के लिए जांच में उपयोगी साबित हो सकते है।

✍️दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
मंदसौर। राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.जेएस दुबे एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। इस बार सेवानिवृत्त पूर्व प्राचार्य डॉ. लक्ष्मीनारायण शर्मा ने उनके खिलाफ उच्च शिक्षा विभाग, अपर मुख्य सचिव, आयुक्त उच्च शिक्षा भोपाल, कलेक्टर मंदसौर, जिला पेंशन अधिकारी और अन्य अधिकारियों को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा है।
शिकायत में प्राचार्य दुबे पर शासन के साथ धोखाधड़ी, वित्तीय अनियमितता, राजस्व की हानि और सेवानिवृत्त कर्मचारी को मानसिक प्रताड़ना देने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
कहा से हुई विवाद की शुरुआत
विवाद स्व.देवीलाल माली (भृत्य) की मृत्यु दिनांक 27 फरवरी 2024 के बाद परिवार पेंशन और शासकीय आवास खाली करने के मुद्दे से शुरू हुआ। डॉ. दुबे ने डॉ. शर्मा को कई नोटिस जारी किए और पेंशन संबंधी भुगतान रोके रखे। इससे आहत होकर डॉ. शर्मा ने शासन स्तर पर जवाबी पत्र के साथ शिकायत दायर की।
डॉ. शर्मा ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि वे दुबे के अधीनस्थ नहीं हैं और प्राचार्य को सेवानिवृत्त अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि दुबे पिछले 11 महीनों से उन्हें जानबूझकर परेशान कर रहे हैं।
शिकायत के मुख्य आरोप
सेवानिवृत प्राचार्य डॉ. लक्ष्मीनारायण शर्मा ने निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग की है –
–प्राचार्य निवास का अनियमित सुधार– बताया जा रहा है कि डॉ.दुबे ने बिना बजट और प्रशासनिक स्वीकृति के लगभग 10 लाख रुपये प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के मद से खर्च कर निवास का सुदृढ़ीकरण करवाया गया।
–छात्र फंड का दुरुपयोग– भोज विश्वविद्यालय के अंतर्गत विद्यार्थियों से प्राप्त राशि से एसी, फर्नीचर, सोफा, अलमारी आदि प्राचार्य निवास पर लगवाए गए। भोज मुक्त विश्वविद्यालय की राशि का उपयोग परीक्षा केंद्र की व्यवस्थाओं के लिए उपयोग की जा सकती है।
–कर्मचारियों का निजी उपयोग– शासकीय एवं जनभागीदारी कर्मचारी प्राचार्य के निजी कार्य कर रहे हैं। प्राचार्य निवास पर तक कर्मचारियों से कार्य करवाया जा रहा है।
–विभागीय आदेशों का उल्लंघन महाविद्यालय की विवरणिका प्रकाशन पर उच्च शिक्षा विभाग का पुराना प्रतिबंध है किन्तु उसके बावजूद डॉ.दुबे ने प्रतिबंध नियम को तोड़कर विवरणिका का प्रकाशन करवा लिया।
–जनभागीदारी कर्मचारियों में अनियमितता– पूर्व प्राचार्यों द्वारा गठित तीन समितियों की अनुशंसा नजरअंदाज कर 14 जनभागीदारी समिति के कर्मचारियों को स्थायी कर दिया गया था, जिससे न्यायालय के आदेश पर विभाग ने आदेश निरस्त कर दिए।
–छात्रवृत्ति घोटाले में दोहरा चरित्र-वर्ष 2016-17 में हुए छात्रवृत्ति घोटाले में पूर्व प्राचार्यों को बचाने का काम भी डॉ.दुबे ने किया है।
–वेतन अनियमितता– प्राचार्य खुद दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर है लेकिन इसके विरुद्ध पद पर वेतन आहरित करने के लिए भोपाल से डेटा ट्रांसफर करवाया लिया गया।
–पुराना रिकॉर्ड– आरोप है कि वर्ष 1999- 2000 में महिला सहकर्मियों का अपमान करने पर डॉ.दुबे की तत्कालीन प्राचार्य डॉ. जे.पी.शर्मा ने शिकायत की थी जिसके बाद इनका मंदसौर से स्थानांतरण।
पूरी शिकायत को पढ़ने के बाद ये स्पष्ट हो गया है कि प्राचार्य डॉ.ज्योति स्वरूप दुबे विवादित व्यक्ति है। वर्ष 1999-2000 के आसपास ये मन्दसौर के राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में पदस्थ रहे हैं। उस दौरान इनकी शिकायत कॉलेज में पदस्थ रही महिला कर्मचारियों ने की थी। जांच के बाद तत्कालीन प्राचार्य ने शासन स्तर पर पत्र लिखा था। जिसके बाद इनका मंदसौर से अन्यत्र स्थानांतरण हो गया था। सर्विस रिकॉर्ड में लाल स्याही से क्या लिखा हुआ है इसके खुलासे को लेकर आरटीआई दाखिल किया जा चुका है जो आयोग में सुनवाई की प्रतीक्षा में लंबित है। शासन स्तर पर हुई जांच में भी खुलासा होने की संभावना है।
अन्य विवाद भी आए सामने
वर्ष 2016-17 के एक छात्रवृत्ति आवंटन प्रकरण में गड़बड़ी की शिकायत पर लोकायुक्त जांच चल रही है। उस जांच में एक सेवानिवृत्त प्राचार्य और एक पूर्व प्राचार्य को बचाने के लिए डॉ.दुबे ने एक जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जिसमें लिखा कि जनजातीय कार्य विभाग मंदसौर की जिला संयोजक जांच में सहयोग नहीं कर रही है। जबकि इनके पास जो दस्तावजे है वो उसी विभाग ने इन्हें उपलब्ध करवाए है। दस्तावेजों में पूर्व प्राचार्य के हस्ताक्षर है जो पुष्टि करते है कि वो घोटाले में शामिल थे उसके बावजूद डॉ.दुबे अपने हिसाब से गलत रिपोर्ट बनाकर जिला संयोजक के हस्ताक्षर करवाने के चक्कर में थे, जिसमें इन्हें सफलता नहीं मिली।
सूचना अधिकार अधिनियम 2005 शासकीय कार्यों में पारदर्शिता के लिए बनाया गया है। किंतु डॉ.दुबे इसका पूरी तरह मखौल उड़ा रहे है। आवेदकों को जानकारी देने के बजाय उनके खिलाफ अनर्गल टिप्पणियां इनके द्वारा की जाती है। जिसको लेकर मामला न्यायालय तक गया है।
यह कहना है –
सेवानिवृत होने के पश्चात प्राचार्य को मुझसे स्पष्टीकरण मांगने का कोई अधिकार नहीं है, किन्तु बार-बार दबाव बनाने के लिए मुझे पत्र भेजे जा रहे है। मेरे पेंशन प्रकरण में रूकावट डाली जा रही है। मैने शासन स्तर से लेकर कलेक्टर को इनके कारनामों की शिकायत प्रस्तुत की है- डॉ.लक्ष्मीनारायण शर्मा, सेवानिवृत प्राचार्य, पीजी कॉलेज, मन्दसौर (म.प्र.)
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।








