दिल्ली। देशभर में शिक्षक भर्ती और योग्यता को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चा के बीच सरकार ने साफ किया है कि शिक्षक बनने के लिए टीईटी पास करना अभी भी जरूरी शर्त है, शिक्षा मंत्रालय ने लोकसभा में दिए लिखित जवाब में बताया कि आरटीई कानून के तहत तय न्यूनतम योग्यता में टीईटी शामिल है और इस नियम का पालन सभी राज्यों में लागू है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि 2011 से पहले नियुक्त कई शिक्षक अभी भी टीईटी से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं का सामना कर रहे हैं, जिसको लेकर संसद में सवाल उठाया गया था। मंत्रालय के अनुसार इस विषय में सुप्रीम कोर्ट के फैसले और मौजूदा नियमों को ध्यान में रखते हुए ही व्यवस्था लागू है और राज्यों को भी इन्हीं निर्देशों के अनुसार काम करना होता है। आईए जानते हैं लोकसभा में शिक्षा मंत्रालय द्वारा टेट छठ पर क्या जानकारी दी गई है।
लोकसभा में क्या पूछा गया सवाल
लोकसभा में एक सवाल के जरिए यह मुद्दा उठाया गया कि 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी के कारण सेवा संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह भी पूछा गया कि क्या सरकार को इस स्थिति की जानकारी है और क्या ऐसे शिक्षकों को कोई राहत देने पर विचार किया जा रहा है। सवाल में यह भी शामिल था कि उस समय नियुक्तियां पुराने नियमों के तहत हुई थीं जब टीईटी जरूरी नहीं था, इसलिए क्या सरकार इस मामले में कोई स्पष्ट राष्ट्रीय नीति बनाने की तैयारी कर रही है।

TET पर सरकार का आधिकारिक जवाब
शिक्षा मंत्रालय की ओर से दिए गए जवाब में बताया गया कि आरटीई कानून 2009 की धारा 23 के अनुसार राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने 23 अगस्त 2010 की गजट नोटिस के जरिए कक्षा 1 से 8 तक शिक्षक बनने के लिए न्यूनतम योग्यता तय की थी, जिसमें टीईटी पास करना जरूरी रखा गया। सरकार ने कहा कि यह नियम देशभर में लागू है और शिक्षक भर्ती के लिए इसी का पालन किया जाता है। मंत्रालय के अनुसार यह प्रावधान गुणवत्ता सुधार के लिए बनाया गया था और इसे सभी राज्यों में लागू रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का शिक्षकों पर असर
सरकार ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि टीईटी शिक्षक नियुक्ति के लिए जरूरी योग्यता है। कोर्ट ने यह व्यवस्था भी दी थी कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त कुछ शिक्षकों को राहत देते हुए उन्हें तय समय के भीतर टीईटी पास करने का मौका दिया जा सकता है। जिन शिक्षकों की सेवा पांच साल से ज्यादा बची थी, उन्हें दो साल के भीतर टीईटी पास करने का अवसर दिया गया, जबकि जिनकी सेवा कम बची थी उन्हें सेवा में बने रहने की अनुमति दी गई, लेकिन बिना टीईटी पास किए पदोन्नति का लाभ नहीं मिलेगा।
2011 से पहले नियुक्त प्राइमरी शिक्षकों की स्थिति
सरकार ने साफ किया कि 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों की नियुक्ति उस समय के नियमों के अनुसार हुई थी, लेकिन वर्तमान में शिक्षक योग्यता के लिए टीईटी जरूरी बना हुआ है। मंत्रालय ने कहा कि टीईटी का उद्देश्य स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना है और इसलिए नियुक्ति या पदोन्नति के लिए यह शर्त लागू रहती है। सरकार के जवाब के अनुसार फिलहाल टीईटी नियमों में किसी बड़े बदलाव की घोषणा नहीं की गई है और राज्यों को मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार ही कार्रवाई करनी है। लोकसभा में दिए गए सरकार के इस जवाब के बाद लाखों शिक्षकों की परेशानी और बढ़ गई है उनके ऊपर शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने का दबाव अधिक हो गया है।
Author: Dashpur Disha
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