साबाखेड़ा के सुपर एग्रो वेयरहाउस से 600 बैग ट्रक में लोड कर भेजे गए; जांच में मंदसौर के विजय बैरागी और इंदौर के नितिन छावड़ा के नाम सामने आए
मंदसौर। भिंड जिले के सुरपुरा में जब्त किए गए 600 बैग एनपीके (NPK 20:20:0:13) खाद के मामले में अंतरराज्यीय नकली खाद नेटवर्क का खुलासा होने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। इस मामले के तार राजस्थान के भीलवाड़ा, मध्यप्रदेश के मंदसौर, रतलाम, इंदौर, भिंड और गुजरात के वलसाड तक जुड़े होने की बात सामने आई है।

जांच में सामने आया है कि जिस खाद की बोरी पर 2,150 रुपए कीमत अंकित थी, उसे महज 425 रुपए प्रति बोरी के हिसाब से खपाया जा रहा था। सुरपुरा में जब्त 600 बोरियों की अंकित कीमत करीब 12.90 लाख रुपए थी, जबकि बिल में जीएसटी सहित इसकी कीमत केवल 2 लाख 67 हजार 750 रुपए दर्शाई गई।
मंदसौर की फर्म के नाम से काटा गया बिल
इस पूरे मामले में मंदसौर की दाईमा एग्रो फॉस्फेट फर्म के नाम से जारी बिल जांच का अहम आधार बना है। बिल में खरीदार के रूप में झंवरलाल शर्मा, सूरजभान चौक, भिंड का नाम दर्ज है। हालांकि बिल में दर्ज 476001 पिनकोड मुरैना शहर का बताया जा रहा है। इस विसंगति ने बिलिंग प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि बिल किस उद्देश्य से तैयार किया गया और इसके जरिए खाद की वास्तविक सप्लाई एवं कीमत को किस तरह दर्शाया गया।
भीलवाड़ा से मंदसौर पहुंचा माल, फिर भिंड भेजे गए 600 बैग
जांच के अनुसार राजस्थान के भीलवाड़ा से विजेश कुमार यादव ट्रक में करीब 700 बैग खाद लेकर रवाना हुआ था। यह माल मंदसौर जिले के साबाखेड़ा स्थित सुपर एग्रो वेयरहाउस पहुंचा। यहां से 600 बैग दूसरे ट्रक में लोड कर भिंड के सुरपुरा भेजे गए, जबकि शेष 100 बैग रतलाम जिले के तात फंटा की ओर भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
जब्त खाद की बोरियों पर निर्माता कंपनी के रूप में गुजरात के वलसाड स्थित उन्नति एग्रो फॉस्फेट प्राइवेट लिमिटेड का नाम अंकित है। कृषि विभाग ने जब्त खाद के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। लैब रिपोर्ट के बाद खाद की वास्तविक गुणवत्ता और उसकी वैधता को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।
जांच में मंदसौर के विजय बैरागी का नाम
जांच में इस नेटवर्क के कथित मुख्य सरगनाओं के रूप में मंदसौर के विजय बैरागी और इंदौर के नितिन छावड़ा के नाम सामने आने आए है। हालांकि पूरे मामले में दोनों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
भिंड में सुरपुरा पुलिस और कृषि विभाग की कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद नेटवर्क से जुड़े लोगों द्वारा साक्ष्य मिटाने के प्रयास किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। बताया जा रहा है कि ट्रक चालक के वॉट्सऐप से गोदाम की लोकेशन तक डिलीट करवा दी गई, जिसके बाद जांच टीम को संबंधित लोकेशन तक पहुंचने में मशक्कत करनी पड़ी।
मंदसौर में 14 वेयरहाउसों पर छापे, नहीं मिला संदिग्ध माल
भिंड में कार्रवाई की सूचना मिलने के बाद मंदसौर कृषि विभाग की टीम ने भी सक्रियता दिखाई और एक साथ 14 वेयरहाउसों पर छापेमारी की। हालांकि कार्रवाई के दौरान टीम को संदिग्ध खाद या संबंधित माल बरामद नहीं हो सका। आशंका जताई जा रही है कि कार्रवाई की भनक लगने के बाद संबंधित लोगों ने माल को पहले ही हटा दिया था।
अब जांच एजेंसियां वेयरहाउसों में माल की आवक-जावक, बिलिंग, परिवहन दस्तावेज और संबंधित लोगों की भूमिका की जानकारी जुटा रही हैं।
सुरपुरा के गोदाम मालिक की भूमिका भी जांच के घेरे में
भिंड के सुरपुरा स्थित जिस गोदाम से 600 बैग खाद बरामद किए गए, उसके मालिक पंकज दीक्षित की भूमिका भी पुलिस जांच रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि गोदाम में खाद किसके निर्देश पर पहुंचाई गई और इसकी बिक्री अथवा वितरण में किन लोगों की भूमिका थी।
2021 में भी सामने आया था मंदसौर का नकली खाद कनेक्शन
नकली खाद के मामले में मंदसौर का कनेक्शन इससे पहले भी सामने आ चुका है। वर्ष 2021 में राजस्थान के भवानीमंडी उपखंड के देवरिया गांव में राजस्थान पुलिस ने नकली खाद बनाने की फैक्ट्री पकड़ी थी। बताया गया था कि यह फैक्ट्री सालासर फास्फेट प्राइवेट लिमिटेड के नाम से संचालित हो रही थी और इसका संचालन पिपलियामंडी निवासी सुभाष अग्रवाल द्वारा किया जा रहा था।
इसके बाद राजस्थान पुलिस ने मंदसौर के बही पार्श्वनाथ स्थित गोदाम पर भी कार्रवाई की थी। जांच में सामने आया था कि उदयपुर की बंद पड़ी फर्म के नाम का इस्तेमाल कर नकली खाद बाजार में खपाने का प्रयास किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार फ्लाई ऐश और कोटा स्टोन के चूरे से नकली खाद तैयार किए जाने की बात भी सामने आई थी।
यह कहना है इनका-
भिंड के सुरपुरा में पकड़ाई अवैध खाद के बारे में जब मन्दसौर कृषि विभाग अधिकारी रविन्द्र मोदी से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि भिंड से सूचना मिली थी जिसके आधार पर हमने साबाखेड़ा क्षेत्र के सभी वेयर हाउसों की जांच की, वेयर हाउसों में गेहूं रखे हुए पाए। जब हमारे पास सूचना आई थी तब तक वेयर हाउस का नाम स्पष्ट नहीं था इसलिए सभी की जांच की। किन्तु साबाखेड़ा के सुपर एग्रो वेयर हाउस में जांच के दौरान खाद के दाने बिखरे मिले। पूछताछ करने पर वेयर हाउस के स्टाफ ने बताया कि यहां ट्रक से माल पलटी हुआ था और तोल हुआ था। तोल कांटे की एंट्री भी पाई गई। ये सूचना हमने भिंड भेज दी।
सुपर एग्रो वेयर हाउस के संचालक आशीष सोमानी से इस संबंध में चर्चा की तो उन्होंने बताया कि हमारे यहां तोल हुआ है। हमने गोडाउन आईटीसी को किराए पर दे रखा है, जिनका गेहूं रखा हुआ है। तोल के दौरान त्रिपाल ढकने से खाद बिखर गया होगा।
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।








