भर्ती घोटाले में दलालों और बिचौलियों पर भी एफआईआर की उठी मांग, पूर्व विधायक सिसौदिया ने कॉमथेन सिक्योरिटी कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
मंदसौर। जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.गोविंद सिंह चौहान के निलंबन के बाद कॉमथेन सिक्योरिटी सर्विस द्वारा बिना शासन स्वीकृति के नियुक्त किए गए 54 मल्टी टास्क वर्करों को कार्यमुक्त कर दिया गया। नौकरी जाने से परेशान कर्मचारियों ने क्षेत्रीय विधायक हरदीप सिंह डंग को ज्ञापन सौंपकर उन्हें सेवा से नहीं हटाए जाने की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, आरोप है कि तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. गोविंद सिंह चौहान और उनके भतीजे जयदीप सिंह ने शासन की स्वीकृति के बिना स्वीकृत पदों से अधिक संख्या में मल्टी टास्क वर्करों की भर्ती सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) एवं ब्लॉक स्तरीय अस्पतालों में कराई थी। आरोप यह भी हैं कि नियुक्ति के लिए प्रत्येक अभ्यर्थी से लाखों रुपये की अवैध वसूली की गई, जिसमें जयदीप सिंह और कथित बिचौलियों की भूमिका सामने आई।
शिकायत के बाद कलेक्टर अदिति गर्ग द्वारा कराई गई जांच में भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं पाए जाने पर डॉ.गोविंद सिंह चौहान के विरुद्ध निलंबन का प्रस्ताव उज्जैन संभागायुक्त को भेजा गया। प्रस्ताव पर कार्रवाई करते हुए संभागायुक्त ने डॉ.चौहान को निलंबित कर दिया। कलेक्टर की अनुशंसा में सीएमएचओ के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने तथा उनके भतीजे जयदीप सिंह की भूमिका की जांच का भी उल्लेख किया गया था।
दलालों और बिचौलियों पर भी कार्रवाई की मांग
मामले में यह मांग भी उठ रही है कि जिन बिचौलियों और कथित दलालों के माध्यम से कर्मचारियों से आवेदन और राशि एकत्र कराई गई, उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कर उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाए। आरोप है कि इन्हीं माध्यमों से कर्मचारियों से वसूली गई रकम सीएमएचओ और उनके भतीजे तक पहुंची। सूत्रों के अनुसार गरोठ विकासखंड के एक सरकारी चिकित्सक का नाम भी इस पूरे प्रकरण में सामने आ रहा है, जिसकी भूमिका की जांच की मांग की जा रही है।
पूर्व विधायक सिसौदिया ने उठाए सवाल
पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसौदिया ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कॉमथेन सिक्योरिटी सर्विस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि 54 कर्मचारियों को बिना पूर्व सूचना एक झटके में कार्यमुक्त करना मनमानी और कर्मचारियों के साथ अन्याय है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर 23 जुलाई 2026 का एक पत्र वायरल हो रहा है, जिसमें कंपनी ने सीतामऊ, मल्हारगढ़, मेलखेड़ा (गरोठ) और संधारा (भानपुरा) के ब्लॉक चिकित्सा अधिकारियों को 1 जुलाई 2026 से कर्मचारियों को कार्यमुक्त करने के निर्देश दिए हैं। जबकि पत्र 23 जुलाई को जारी किया गया। सिसौदिया ने सवाल उठाया कि यदि कंपनी को मार्च और अप्रैल के भुगतान के बाद भी आर्थिक परेशानी थी तो यह निर्णय पहले क्यों नहीं लिया गया और सीएमएचओ के निलंबन के बाद ही यह कार्रवाई क्यों की गई।
कंपनी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि कॉमथेन सिक्योरिटी सर्विस पहले भी विवादों में रही है और देवास जिले में ब्लैकलिस्ट किए जाने की बात सामने आ चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि मंदसौर में कंपनी ने कथित रूप से बिना निर्धारित प्रक्रिया और टेंडर के करीब दो वर्षों तक कार्य किया। उन्होंने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कर्मचारियों के हितों की रक्षा करते हुए नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।








