रात के अंधेरे में मंडी टैक्स को ‘चूना’, शामगढ़-गरोठ से पंजाब तक फैला ‘गेहूं तस्करी’ का जाल

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शामगढ़। मध्यप्रदेश की शामगढ़, गरोठ, चंदवासा, सुवासरा और भानपुरा मंडियों में गेहूं की बम्पर आवक के बीच एक बड़े पैमाने का तस्करी रैकेट सक्रिय हो गया है। रसूखदार व्यापारी स्थानीय मंडियों को पूरी तरह दरकिनार कर बिना अनुज्ञा के रात के अंधेरे में ट्रक-ट्रेलर राजस्थान की सीमा पार करा रहे हैं। इसके बाद मध्यप्रदेश का गेहूं राजस्थान का बताकर पंजाब और जम्मू-कश्मीर की मंडियों तक पहुंचाया जा रहा है। इस खेल में न सिर्फ मंडी टैक्स की चोरी हो रही है, बल्कि कागजी हेराफेरी से सरकारी राजस्व को करोड़ों का नुकसान पहुंच रहा है।

शुक्रवार 20 मार्च की शाम शामगढ़ से RJ-32 क्रमांक का एक ट्रेलर गेहूं लादकर रवाना हुआ। गरोठ क्षेत्र पार करते हुए भानपुरा पहुंचने तक इसके पास कोई वैध अनुज्ञा नहीं थी। सूत्रों के अनुसार ट्रेलर कई घंटे भानपुरा में खड़ा रहा ताकि राजस्थान से फर्जी कागजात तैयार हो सकें। कागजात ‘मैनेज’ होते ही ट्रेलर भानपुरा मंडी के ठीक सामने से बेखौफ गुजरकर राजस्थान के बेगू की ओर रवाना हो गया। हैरानी की बात यह कि ट्रेलर की टोल कांटा पर्ची शामगढ़ मंडी की थी।

कैसे चल रहा है खेल?
जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि शामगढ़, गरोठ, सुवासरा और चंदवासा से लोड होने वाले ट्रकों की अनुज्ञा मध्यप्रदेश की बजाय राजस्थान से क्यों बन रही है? सूत्र बताते हैं कि कोटा, बेगू, चौमेहला, भवानीमंडी, डग और श्रीगंगानगर के नाम से फर्जी परमिट तैयार किए जा रहे हैं। श्रीगंगानगर पंजाब की सीमा से सटा है, जहां गेहूं की फसल अभी डेढ़ महीने बाद ही आएगी। इस कमी को पूरा करने के लिए मध्यप्रदेश का गेहूं रात के सन्नाटे में पंजाब की मंडियों तक पहुंचाया जा रहा है।

रोजाना 50 ट्रक का धंधा
सूत्रों का दावा है कि रोजाना करीब 50 ट्रक शामगढ़, चंदवासा, सुवासरा, खड़ावदा और गरोठ से रात में भानपुरा मार्ग होकर राजस्थान में एंट्री कर रहे हैं। भानपुरा तक ‘सेटिंग’ इतनी मजबूत है कि मंडी नाकों पर इन गाड़ियों को कोई रोकता नहीं। वर्तमान में इन मंडियों में तहसीलदार भारसाधक अधिकारी के रूप में प्रभारी हैं, लेकिन व्यापारियों के इस गड़बड़झाले की भनक इन अधिकारियों तक नहीं पहुंचने दी जा रही है।

दोहरी कमाई का फॉर्मूला
स्थानीय स्तर पर मंडी टैक्स बचाकर ‘चवन्नी’ का मुनाफा और पंजाब-कश्मीर में माल बेचकर ‘अठन्नी’ की कमाई हो रही है। राजस्थान की मंडियों के नाम पर बनाई गई अनुज्ञा के कारण शामगढ़, गरोठ और भानपुरा मंडियों का राजस्व सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है।

मंडी प्रशासन को चेतावनी
भानपुरा मंडी पहले से ही व्यापारियों के ना आने के कारण दिनभर ठंडी पड़ी रहती है। यदि राजस्व बढ़ाना है तो रात में निकल रही इन गाड़ियों की सख्त चेकिंग जरूरी है। 5 गुना पेनल्टी सहित अन्य टैक्स वसूल कर मंडी की आय में कई गुना बढ़ोतरी की जा सकती है। भारसाधक अधिकारियों को तुरंत यह जांच करनी चाहिए कि मंडी में आवक कितनी हुई और अनुज्ञा कितनी बनी है। क्योंकि आवक के नाम पर गेहूं तो खूब आ रहा है, लेकिन उसकी अनुज्ञा दूसरे प्रदेश से बनकर व्यापारियों के लिए ‘सवाया सौदा’ बन रही है।

साभार – विक्रम सिसौदिया (सिम्पल समाचार)

Dashpur Disha
Author: Dashpur Disha

दशपुर दिशा समाचार पत्र भारत के प्रेस महापंजीयक कार्यालय नई दिल्ली से पंजीकृत है। दशपुर दिशा मालवांचल में खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित समाचार पत्र है। www. dashpurdisha.com हमारी अधिकृत वेबसाइट है।

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