दिल्ली। अमेरिका में पढ़ाई कर रहे विदेशी छात्रों के लिए नौकरी का रास्ता महंगा होने जा रहा है। ट्रंप प्रशासन Optional Practical Training (OPT) के लिए करीब 40 हजार रुपये की जगह लगभग 1 लाख डॉलर (लगभग 96 लाख रुपये) फीस लगाने की तैयारी कर रहा है। यह प्रस्ताव व्हाइट हाउस की मंजूरी पा चुका है, लेकिन अभी लागू नहीं हुआ है। लागू करने से पहले जनता और संस्थानों से आपत्तियां तथा सुझाव मांगे जाएंगे।
OPT क्या है और कितना समय मिलता है?
OPT के तहत विदेशी छात्र ग्रेजुएशन के बाद अमेरिका में काम कर सकते हैं। सामान्य रूप से 12 महीने तक अनुमति मिलती है। साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स (STEM) विषयों के छात्रों को अतिरिक्त 24 महीने मिलते हैं, यानी कुल 36 महीने तक काम करने का मौका।

यह फीस ट्यूशन फीस और रहने-खाने के खर्च के अलावा होगी। इससे अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी की योजना बना रहे छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
भारतीय छात्रों पर असर
अमेरिका में इस समय करीब 11 लाख विदेशी छात्र पढ़ रहे हैं, जिनमें से लगभग 3.63 लाख भारतीय हैं। विदेशी छात्रों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है। OPT के तहत 2 लाख से अधिक भारतीय छात्र पहले से काम कर रहे हैं। ऐसे में फीस बढ़ने का सबसे बड़ा असर भारतीय छात्रों पर पड़ने की आशंका है।
अमेरिका में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पर करीब 50 लाख रुपये तक फीस लग सकती है। इसके अलावा रहने, खाने और अन्य खर्च भी होते हैं। कई छात्र पढ़ाई के दौरान पार्ट-टाइम काम करके इन खर्चों को संभालते हैं। अतिरिक्त भारी फीस से कई छात्र अमेरिका के बजाय जर्मनी, फ्रांस जैसे यूरोपीय देशों के विकल्प तलाश सकते हैं, जहां पढ़ाई के बाद काम करने की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
आवेदनों में कमी और वजहें
एक रिपोर्ट के अनुसार भारत से आने वाले आवेदकों की संख्या में 15 प्रतिशत कमी दर्ज की गई है। इसके मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:
सख्त वीजा नियम और इमिग्रेशन नीतियां, जिनसे छात्रों में अनिश्चितता बढ़ी है।
छात्र और विजिटर वीजा के लिए नई समय-सीमा, जिससे कई मामलों में अमेरिका में रहने की अवधि चार साल तक सीमित हो सकती है।
OPT जैसी भारी फीस का डर।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने छात्रों को ईमेल भेजकर कहा है कि वह मौजूदा स्थिति को समझती है और पूरे मामले पर नजर रख रही है।
H-1B वीजा पर भी भारी फीस का प्रस्ताव
इसके अलावा अगस्त में H-1B वीजा को लेकर भी नया प्रस्ताव आया था। इसके मुताबिक विदेशी कर्मचारियों को हर H-1B वीजा के लिए 1,03,265 डॉलर (लगभग 98 लाख रुपये) अतिरिक्त फीस देनी होगी। पहले यह फीस आमतौर पर 2,000 से 5,000 डॉलर (लगभग 1.9 से 4.7 लाख रुपये) के बीच थी।
कुल मिलाकर, अमेरिका में पढ़ाई और उसके बाद नौकरी का रास्ता विदेशी छात्रों, खासकर भारतीयों के लिए काफी महंगा और चुनौतीपूर्ण बनता दिख रहा है। प्रस्ताव अभी अंतिम रूप में लागू नहीं हुआ है, इसलिए आगे की प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है।
Author: Dashpur Disha
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