कड़ाके की ठण्ड में छात्रों को नही दिए जा रहे ओढ़ने के लिए कम्बल, समस्याओं के समाधान के लिए सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करने पर धमका रही थी जिला संयोजक रेखा पांचाल
मन्दसौर। आदिम जाति कल्याण विभाग मन्दसौर के महाविद्यालयीन छात्रावास के छात्रों ने पिछले दिनों छात्रावास की समस्याओं को लेकर सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतें दर्ज करवाई थी।
शिकायतें दर्ज होने के बाद आदिम जाति कल्याण विभाग की जिला संयोजक रेखा पांचाल ने छात्रों को सूचना पत्र जारी कर दिए थे। छात्रों का आरोप था कि मैडम छात्रावास में समस्याओं का समाधान करने के बजाय हमें धमका रही है, सीएम हेल्पलाइन शिकायत कटवाने के लिए दबाव बना रही है।
इस घटनाक्रम के बाद भी जब आदिम जाति कल्याण विभाग मन्दसौर की जिला संयोजक रेखा पांचाल ने छात्रावास में छात्रों की समस्याओं का समाधान नही किया तो आज छात्रावास के छात्रों ने एनएसयूआई के साथ मिलकर कलेक्टर कार्यालय में धरना दे दिया।
कलेक्टर कार्यालय में छात्रावास के छात्रों के साथ छात्र संगठन एनएसयूआई और कांग्रेस नेता जिला पंचायत सदस्य दीपक सिंह चौहान, अशांशु संचेती, रूपल संचेती सहित अन्य नेता मौजूद थे।
मौके पर उपस्थित छात्रों को समझाइश देने के लिए मन्दसौर एसडीएम शिवलाल शाक्य प्रयास करते रहे लेकिन छात्र एक ही मांग पर अड़े हुए है कि छात्रावास अधीक्षक चरण सिंह को हटाया जाए और जिला संयोजक रेखा पांचाल के विरूद्ध उचित कार्रवाई की जावे।

ठण्ड में छात्रों को कम्बल नही दिए जा रहे
छात्रावास के छात्रों की इस बात पर जिम्मदार अधिकारियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। कड़ाके की ठण्ड में लोग कम्बल दान करते है, लोगो को ओढ़ने की व्यवस्था करवाते है। नगरपालिकाए ठण्ड से लोगों को बचाने के लिए अलाव जलाने की व्यवस्था करवाती है। कल ही विधायक विपिन जैन में जिला चिकित्सालय में आने वाले मरीजों के अटेंडरों के लिए निःशुल्क कम्बल, रजाई, गद्दे, तकिए उपयोग हेतु व्यवस्था करवाई है। लेकिन दूसरी तरफ सरकारी छात्रावास में कड़ाके की ठंड में कम्बल होने के बावजूद छात्रों को ओढ़ने के लिए नही देना और शिकायत के बाद उन्हें धमकाना क्या प्रदर्शित करता है। सालाना छात्रावास के छात्रों की व्यवस्थाओं के लिए शासन से बड़ा बजट विभाग को प्राप्त होता है उसके बावजूद ऐसी आवश्यक वस्तुओं में कटौती विभाग की और विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह खड़े करती है।

ये है छात्रावास के छात्रों की मांग
1.छात्रावास में कम्बल उपलब्ध होने के बावजूद भी छात्रों को ओढ़ने के लिए नही दिए जा रहे है। छात्रों के कम्बलों का उपयोग कर्मचारी कर रहे है।
2.खाने की व्यवस्था भी ठीक नही है। जिन कर्मचारियों को खाना बनाने की जिम्मेदारी दी उन्होंने दूसरे मजदूर रख लिए जिन्हें खाना बनाना भी नही आता। छात्र कभी कच्ची तो कभी जली हुई रोटियां और सब्जी खाने पर मजबूर है।
3.छात्रों की संख्या के अनुसार बाथरूम की व्यवस्था नही है केवल 2 ही बाथरूम उपयोग करने लायक है।
4.अधीक्षक छात्रों का फोन रिसीव नही करते और न ही समय पर होस्टल में उपलब्ध रहते है।
छात्रों ने इन समस्याओं के समाधान के साथ ही छात्रावास अधीक्षक चरण सिंह को निलंबित करने और जिला संयोजक रेखा पांचाल पर कार्रवाई की मांग की।
यह कहना है इनका-
पिछले आठ महीने से छात्रावास अधीक्षक ने हमारी समस्या का समाधान नही किया, डीईओ मैडम को भी आवेदन दे चुके, सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत कर चुके लेकिन कोई समाधान नही हुआ। छात्रावास अधीक्षक को निलंबित करने के लिए हम धरना दे रहे है – विकास, छात्र
जिला कार्यालय और जनसुनवाई में आवेदन के बाद भी सुनवाई नही हुई। अधीक्षक का रवैया ठीक नही है। छात्रावास में कम्बल उपलब्ध होने के बावजूद कड़ाके की ठंड में कम्बल नही दिए जा रजे है, भोजन की गुणवत्ता भी खराब है- रोहित परिहार,छात्र
छात्रावास में चल रही समस्याओं को लेकर धरना दिया जा रहा है। कच्ची रोटी, पानी वाली दाल छात्रों को दी जा रही है। कड़ाके की ठंड में छात्रों को कम्बल नही दिए जा रहे है- राघव सिंह शक्तावत एनएसयूआई नेता
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।









