मंदसौर। शहर में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। ताजा मामला कलेक्टर ऑफिस के सामने का है, जहां एक बार फिर ओवरस्पीड के कारण हुआ हादसा चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही में हुए एक दर्दनाक हादसे में मंडी व्यापारी दीपक जैन की जान चली गई। हैरानी की बात यह है कि इस हादसे का आरोपी कोई नौसिखिया नहीं, बल्कि एक पढ़ा-लिखा डॉक्टर है, जिससे सड़क पर अनुशासित व्यवहार की उम्मीद की जाती है।
शहर में ओवरस्पीड और लापरवाही भरी ड्राइविंग आम बात हो गई है। कृषि उपज मंडी से श्रीकोल्ड और गुराड़िया बालाजी से काबरा पेट्रोल पंप तक के 3 किलोमीटर के शहरी क्षेत्र में हर दूसरे-तीसरे दिन हादसे हो रहे हैं। इस इलाके में न तो स्पीड ब्रेकर हैं और न ही एलआईसी से काबरा पंप तक 1 किलोमीटर के दायरे में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था। शहर में सड़कों की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए युवा प्रीतेश गुप्ता फेसबुक पर लिखते है कि लोग इस सड़क को मजाक में “नोएडा का बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट” या “8-लेन हाइवे” कहने लगे हैं।

स्पीड कंट्रोल की कमी, इंटरसेप्टर व्हीकल गायब
पहले जब सड़कें टूटी-फूटी थीं, तब सरकार ने स्पीड कंट्रोल के लिए इंटरसेप्टर व्हीकल तैनात किए थे। लेकिन अब, जब सड़कें बेहतर हो चुकी हैं और वाहन बेलगाम रफ्तार से दौड़ रहे हैं, तब इन व्हीकल्स का कोई अता-पता नहीं है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क सुरक्षा के लिए जिम्मेदार प्रशासन और पुलिस “सो रही है”।
सीएम हेल्पलाइन भी नाकाम
सड़क सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर कई बार सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन इनका कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अधिकारी शिकायत वापस लेने का दबाव बनाते हैं या बिना समाधान के शिकायत को बंद कर देते हैं।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि शहरी क्षेत्रों में 30 किमी/घंटा की स्पीड लिमिट लागू की जाए और इंटरसेप्टर व्हीकल के जरिए नियम तोड़ने वालों को सीधे चालान भेजा जाए। साथ ही, नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों को भी इस नियम से छूट न दी जाए। इसके अलावा, सड़कों पर स्पीड ब्रेकर और स्ट्रीट लाइट की तत्काल व्यवस्था की मांग उठ रही है।
शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि सरकारें सिर्फ वोट के लिए 1000-2000 रुपये ट्रांसफर कर अपनी जिम्मेदारी पूरी समझ लेती हैं, लेकिन सड़क सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर ध्यान नहीं देतीं। कई बार हादसों की तस्वीरें और शिकायतें की गईं, लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सवाल यह है कि क्या सरकार और प्रशासन तब तक चुप रहेगा, जब तक कोई बड़ा हादसा उनके अपने दरवाजे पर न दस्तक दे?
मंदसौर में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या ने प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया है।
Author: Dashpur Disha
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