मध्य प्रदेश व्यापमं घोटाला: CBI कोर्ट ने 11 आरोपियों को ठहराया दोषी, प्रत्येक को 3 साल की सजा

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भोपाल। मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं घोटाले (MP Vyapam Scam) में भोपाल की विशेष CBI कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 11 आरोपियों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 3 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला 2012 में आयोजित मध्य प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा (PCRT-2012) से संबंधित है, जिसमें अभ्यर्थियों ने नकल और प्रतिरूपण (impersonation) जैसे अनुचित साधनों का उपयोग कर परीक्षा पास की थी।

मामले का विवरण
विशेष CBI कोर्ट के जज नितिराज सिंह सिसोदिया ने इस मामले में छह अभ्यर्थियों और पांच प्रतिरूपकों (solvers) को दोषी पाया। दोषी अभ्यर्थियों में लोकेंद्र कुमार धाकड़, अविनाश जयंत, राजेश प्रजापति, भूरा रावत, राधेश्याम यादव और विकास रावत शामिल हैं। वहीं, प्रतिरूपकों में हेमंत सिंह जाट, सर्वेश कुमार झा, नरेश प्रजापति, रामवीर सिंह रावत और हरिओम तोमर के नाम शामिल हैं। इन सभी पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 419 (प्रतिरूपण), 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), 468 (जालसाजी के लिए दस्तावेज तैयार करना), 471 (जाली दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग करना), 120B (आपराधिक साजिश) और मध्य प्रदेश मान्यता प्राप्त शिक्षा (MPRE) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत आरोप सिद्ध हुए।
CBI के विशेष लोक अभियोजक सुशील कुमार पांडे के अनुसार, 30 सितंबर, 2012 को व्यापमं द्वारा आयोजित पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में इन अभ्यर्थियों ने अपने स्थान पर प्रतिरूपकों को परीक्षा में बैठाया था। इसकी वजह से सभी छह अभ्यर्थी लिखित परीक्षा में पास हो गए थे। मामले का खुलासा होने के बाद CBI ने जांच शुरू की और सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान जज सिसोदिया ने सभी 11 आरोपियों को दोषी ठहराया और प्रत्येक को 3 साल की कठोर कारावास की सजा के साथ-साथ 16,000 रुपये का कुल जुर्माना भी लगाया।

घोटाले की पृष्ठभूमि
व्यापमं घोटाला, जिसे मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (MPPEB) के नाम से भी जाना जाता है, 2013 में सामने आया था। यह घोटाला 1990 के दशक से सक्रिय था और इसमें राजनेताओं, वरिष्ठ अधिकारियों, नौकरशाहों और बिचौलियों का एक बड़ा नेटवर्क शामिल था। इस घोटाले में परीक्षाओं में नकल, प्रतिरूपण, ओएमआर शीट में हेरफेर और रिश्वतखोरी जैसे गंभीर अपराध शामिल थे। व्यापमं द्वारा आयोजित 13 विभिन्न परीक्षाओं, विशेष रूप से मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं (PMT) और पुलिस भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएं पाई गई थीं।
2013 में इंदौर पुलिस ने 20 प्रतिरूपकों को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ। जांच के दौरान जगदीश सागर जैसे रैकेट लीडरों सहित 2000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। 2015 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले की जांच CBI को सौंपी गई थी। तब से CBI ने 150 से अधिक मामलों में चार्जशीट दाखिल की है और कई आरोपियों को सजा सुनाई जा चुकी है।

कोर्ट की कार्यवाही और सजा
इस मामले में CBI ने 3 अगस्त, 2015 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच शुरू की थी। मध्य प्रदेश पुलिस की विशेष कार्य बल (STF) ने शुरुआती जांच की थी और 2014 में चार्जशीट दाखिल की थी। CBI ने बाद में अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल की और फरार आरोपियों को भी ट्रेस किया। सुनवाई के दौरान 32 गवाहों और 220 दस्तावेजों की जांच की गई, जिसके आधार पर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।

प्रमुख दोषी और उनकी भूमिका
▪️लोकेंद्र कुमार धाकड़: हेमंत सिंह जाट ने उनकी जगह परीक्षा दी।
▪️अविनाश जयंत: सर्वेश कुमार झा ने उनके लिए परीक्षा दी।
▪️राजेश प्रजापति: उनके भाई नरेश प्रजापति ने उनकी जगह परीक्षा दी।
▪️भूरा रावत: रामवीर सिंह रावत ने उनकी जगह परीक्षा दी।
▪️विकास रावत: हरिओम तोमर ने उनकी जगह परीक्षा दी।
▪️राधेश्याम यादव: एक अज्ञात प्रतिरूपक ने उनकी जगह परीक्षा दी।

सजा का प्रभाव
यह फैसला व्यापमं घोटाले से संबंधित मामलों में CBI की सक्रियता और कोर्ट की कठोरता को दर्शाता है। इससे पहले भी इस घोटाले में कई आरोपियों को 5 से 7 साल तक की सजा सुनाई जा चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले भविष्य में परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देंगे।

Dashpur Disha
Author: Dashpur Disha

दशपुर दिशा समाचार पत्र भारत के प्रेस महापंजीयक कार्यालय नई दिल्ली से पंजीकृत है। दशपुर दिशा मालवांचल में खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित समाचार पत्र है। www. dashpurdisha.com हमारी अधिकृत वेबसाइट है।

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