मंदसौर। गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में एक ऐतिहासिक खोज सामने आई है। दिनांक 1 जुलाई 2025 को वनमंडल मंदसौर के अंतर्गत इस अभयारण्य में लगाए गए कैमरा ट्रैप में दुर्लभ और विलुप्तप्राय प्रजाति कैराकल, जिसे स्थानीय रूप से स्याहगोश के नाम से जाना जाता है, की उपस्थिति दर्ज की गई है। यह खोज न केवल जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मध्यप्रदेश के संरक्षण प्रयासों की सफलता का भी प्रमाण है।
कैराकल: एक दुर्लभ और शर्मीला शिकारी
कैराकल एक अत्यंत शर्मीला, रात्रिचर और तेज गति से दौड़ने वाला मांसाहारी प्राणी है। यह प्रजाति मुख्य रूप से शुष्क, झाड़ीदार, पत्थरीले और खुले घास के मैदानों में पाई जाती है। भारत में यह प्रजाति अब विलुप्तप्राय श्रेणी में आती है, और इसकी उपस्थिति अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है। कैमरा ट्रैप में कैद हुआ यह कैराकल एक वयस्क नर है, जो गांधीसागर अभयारण्य के संरक्षित आवास की गुणवत्ता को दर्शाता है।

गांधीसागर अभयारण्य: जैव विविधता का खजाना
गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य के शुष्क और अर्द्ध-शुष्क पारिस्थितिक तंत्र ने इस दुर्लभ प्रजाति को आश्रय प्रदान किया है। कैराकल की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि यह क्षेत्र अभी भी जैव विविधता के लिए एक समृद्ध और संतुलित आवास बना हुआ है। मध्यप्रदेश में पिछले कई वर्षों में किसी संरक्षित क्षेत्र में कैराकल की उपस्थिति की यह पहली आधिकारिक पुष्टि है, जो पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।
संरक्षण प्रयासों की जीत
यह खोज मध्यप्रदेश वन विभाग और गांधीसागर अभयारण्य के कर्मचारियों के समर्पित प्रयासों का परिणाम है। निरंतर निगरानी, वैज्ञानिक प्रबंधन और आवास संरक्षण के कारण यह अभयारण्य दुर्लभ प्रजातियों के लिए एक सुरक्षित आश्रयस्थली बन गया है। इस उपलब्धि के लिए मध्यप्रदेश वन विभाग और अभयारण्य के कर्मचारियों को विशेष रूप से धन्यवाद दिया गया है।
Author: Dashpur Disha
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