मन्दसौर। देशभर में कांग्रेस पार्टी इन दिनों अपने संगठन को मजबूत करने के लिए संगठन सृजन अभियान चला रही है। इस अभियान के तहत जिलाध्यक्ष और यूथ कांग्रेस अध्यक्ष के चयन को लेकर नेताओं की दावेदारियां सामने आ रही हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में गुटबाजी और आंतरिक राजनीति ने एक बार फिर कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे चर्चित मामला एक युवा नेता के नामांकन फॉर्म का उम्र सीमा के कारण निरस्त होना है। यह खबर इसलिए सुर्खियों में नहीं है कि उनका फॉर्म खारिज हुआ, बल्कि इसलिए कि इस घटना से कांग्रेस के ही कुछ युवा नेता खुश हैं और सोशल मीडिया पर तरह-तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, एक अन्य युवा नेता का फॉर्म भी आयु सीमा के कारण निरस्त हुआ, लेकिन उसकी चर्चा उतनी नहीं हो रही।

गुटबाजी और राजनीतिक समीकरणों का खेल
नामांकन फॉर्म निरस्त होने के पीछे कई राजनीतिक दांव-पेंच और समीकरण काम कर रहे हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सृजन अभियान के जरिए अच्छे लोगों को आगे लाकर संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। लेकिन स्थानीय स्तर पर कुछ नेता गुटबाजी खत्म होने देना नहीं चाहते। हैरानी की बात यह है कि इस गुटबाजी में अब युवा नेता भी शामिल हो गए हैं। नामांकन निरस्त होने की खुशी न तो भाजपा कार्यकर्ताओं में है और न ही किसी अन्य पार्टी में, बल्कि यह खुशी कांग्रेस के ही कुछ युवा नेताओं में देखी जा रही है।
नामांकन निरस्त होना कोई नई बात नहीं
संगठन चुनावों में नामांकन फॉर्म का निरस्त होना कोई नई बात नहीं है। मुख्य चुनावों में भी उम्मीदवारों के फॉर्म विभिन्न कारणों से खारिज होते हैं। लेकिन कांग्रेस के लिए यह चिंता का विषय इसलिए है, क्योंकि पार्टी लंबे समय से सत्ता से बाहर है (कमलनाथ सरकार के 15 महीने के कार्यकाल को छोड़कर)। ऐसे में संगठन सृजन अभियान के दौरान भी संकीर्ण सोच और गुटबाजी का रवैया पार्टी के भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
राहुल गांधी के आव्हान पर शुरू किया गया सृजन अभियान कांग्रेस को एकजुट और मजबूत करने का प्रयास है। इसका मकसद संगठन में नए और योग्य चेहरों को मौका देना है। लेकिन स्थानीय स्तर पर कुछ नेताओं की आपसी खींचतान और संकीर्ण मानसिकता इस अभियान को कमजोर कर रही है।
पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि जब तक कांग्रेस अपनी आंतरिक कलह और गुटबाजी को खत्म नहीं करेगी, तब तक सत्ता में वापसी का सपना मुश्किल रहेगा। एक युवा नेता के नामांकन निरस्त होने पर खुशी मनाने वाले कार्यकर्ताओं को यह समझना होगा कि आपसी लड़ाई में उलझकर वे न केवल संगठन को कमजोर कर रहे हैं, बल्कि अन्य दलों के खिलाफ चुनावी जंग जीतने की संभावनाओं को भी कम कर रहे हैं।
कांग्रेस का सृजन अभियान पार्टी को नई दिशा देने का मौका है, लेकिन अगर युवा नेता भी पुरानी गुटबाजी की राह पर चलेंगे, तो यह अभियान अपनी मंजिल से भटक सकता है। सवाल यह है कि क्या कांग्रेस अपनी आंतरिक कमजोरियों को दूर कर सत्ता की ओर बढ़ पाएगी, या फिर आपसी कलह में उलझकर विपक्ष में ही बनी रहेगी?
पार्टी आलाकमान को इस पर चिंतन करना चाहिए कि इस तरह की आपसी सियासत से संगठन सृजन होगा या विध्वंस ?
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।









