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राजाराम फैक्ट्री की तोड़ी प्रशासन ने दीवार, फैक्ट्री मैनेजर ने कहा न मुआवजा दिया और न नोटिस, मामला न्यायालय में लंबित होने के बावजूद दादागिरी पूर्वक तोड़ी दीवार

मंदसौर। मुक्ति धाम के निकट शिवना नदी पर ब्रिज का काम चल रहा है। पिछले 4 साल से चल रहे ब्रिज निर्माण 2 साक पहले ही हो जाना था। अधिकारियो के चहेते ठेकेदार ने काफ़ी समय ख़राब कर दिया है। यह ब्रिज काफ़ी समय पहले बन जाना था। लेकिन, ठेकेदार की लापरवाही व ढीलफुल रवैये के चलते यह काम बहुत लेट हो गया हैं। यह ठेकेदार संजीत नाका ओवरब्रिज भी बना रहा है, उस ब्रिज का अभी पूरा काम ही नहीं हुआ है और ठेकेदार वहां के काम क़ो अधर में लटकाकर शिवना ब्रिज के काम में जुट गया है। सेतु विकास निगम के अधिकारियों की बात करें, तों वह ठेकेदार के साथ हमेशा इस तरह खड़े रहते है, जैसे दुख सुख के साथी हों। सेतु विकास निगम के अधिकारियो ने अब आनन फानन में शिवना ब्रिज के निकट बन रहे ओवरब्रिज के लिये आसपास के क्षेत्र की जगह पर कार्यवाही कर पुल के निर्माण के साथ ही अप्रोच रोड बनाने के उपयोग में लेने के लिए जमीन क़ो अधिग्रहण करने हेतु शुक्रवार को स्थानीय प्रशासनिक अमले के साथ मुक्तिधाम के निकट पहुंचा, उन्होंने राजाराम ब्रदर्स की दीवार को तोड़ दिया। करीब 850 स्क्वायर मीटर जगह को अधिग्रहित किया गया है, जिसके एवज में 22 लाख रूपये का मुआवजा पारित किया था। राजाराम ब्रदर्स द्वारा मुआवजा नहीं लिए जाने पर एसडीएम कार्यालय में जमा करवा दिया है।इसमें बड़ी बात यह है की जिस जगह का अधिग्रहण किया गया है, उसका मुआवजा असिंचित भूमि के रूप में आँका गया हैं। जबकि राजपत्र प्रकाशन में इस भूमि को व्यवसायिक कहा गया हैं। लेकिन, प्रशासनिक रवैये की दुर्भावना के चलते शहर के सेकड़ो लोगो को रोजगार देने वाले संस्थान को परेशान किया जा रहा हैं।
बता दें की मुक्तिधाम के निकट बन रहे पुल निर्माण में अभी गर्डर का काम अभी पूरा नहीं हुआ है और आसपास के क्षेत्र में काम शुरु कर दिया है। जिससे आम लोगों के निकलने के लिए अप्रोच सड़क का काम शुरु किया जा सके।
इधर संजीत नाका ब्रिज का निर्माण लगभग पूरा हो चूका हैं। लेकिन वहां अभी भी एप्रोच रोड का कम शुरु नहीं हुआ हैं। जबकि, मुक्तिधाम के निकट आसपास की जगह की तोड़ना शुरु कर दिया। इस मामले में ज़ब तहसीलदार से बात की तों उन्हें भी मामला पूरा संज्ञान में नहीं है, उनका कहना है की यहां पुल निर्माण के लिए अधिग्रहण किया गया है। इसलिए आज कार्यवही हो रही है।
लोक निर्माण विभाग के इंजिनियर नरवरे से जब पूछा गया की यह जगह व्यवसायिक हैं फिर आपने असिंचित भूमि मानकर मुआवजा कैसे दिया। जिसकी भूमि हैं, उसे भी संतुष्ट करना चाहिए था। इस पर वे कोई जवाब नहीं दें पाए। वे इतना ही कह सके की हमने संबधित को मुआवजा दें दिया हैं।

ना नोटिस मिला ना मुआवजा, मामला अदालत में लंबित
मामले में राजाराम ब्रदर्स के मैनेजर से चर्चा की गई तो उनका कहना था की हमें दीवार तोड़ने का ना तो नोटिस मिला हैं ना ही मुआवजा मिला हैं। मामला अदालत में लंबित हैं। इस मामले में कोई फैसला नहीं हुआ हैं। हमारा मुआवजा 4 करोड़ 68 लाख रुपये पास हुआ था जो सेतु विकास निगम ने आज तक नहीं दिया हैं और दादागिरी से फैक्ट्री की दीवार तोड़ दी गई। यह सरासर ज़्यादती है।

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Author: Admin

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