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सीएमओ ने खुद की पोल खुलने के डर से पार्षदों का आक्रोश भांपकर मांग ली तत्काल माफ़ी

आक्रोशित पार्षद ज्यादा भ्रष्टाचार की पोल न खोले इसलिए सीएमओ ने तत्काल माफी मांगकर कर्मचारी का चार्ज बदल दिया

मन्दसौर । नगरपालिका मन्दसौर में वैसे तो लंबे समय से सब कुछ ठीक नही चल रहा है । 40 पार्षदों में से 23 पार्षद भाजपा के होने के बावजूद उनकी नगरपालिका में जनहित की मांगों पर भी सुनवाई नही हो रही है । इस बात को लेकर पहले भी पार्षदों में आक्रोश देखा गया था । भाजपा कार्यालय में भी असंतुष्ट पार्षदों ने पार्टी के समक्ष अपनी बात रखी थी, लेकिन उसके बावजूद कोई हल नही निकला ।
एक तरफ विधानसभा चुनाव नजदीक है दूसरी तरफ छोटे छोटे कामो पर नगरपालिका आम आदमी तो ठीक पार्षद व सभापति की भी सुनवाई नही कर रही है । भ्रष्टाचार को दबाने के के लिए नपा कर्मचारी फ़ाइले सार्वजनिक करने से घबरा रहे है । सीएमओ तो ठीक छोटे कर्मचारी भी जनप्रतिनिधियों की बात सुनने को तैयार नही है । इन सब बातों को लेकर पार्षदों के एक दल ने कल सीएमओ सुधीर सिंह को उन्हीं के चेम्बर में खूब खरी खरी सुनाई । सत्ताधारी दल के पार्षदों की एकता और गुस्सा देखकर सीएमओ ने स्थिति को भांपकर माफ़ी मांगने में जरा भी देर नही की । इस घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए तो लोगों ने खूब चटकारे लिए । केंद्र, प्रदेश से लेकर नपाध्यक्ष और पार्षदों तक भाजपा का राज है उसके बावजूद उनकी सुनवाई नही हो रही तो अनुमान लगाया जा सकता है विपक्षी दल के पार्षदों और आम जनता की नगरपालिका में क्या हाल होता होगा ।

नपा की स्थिति से भाजपा क्यूं बनी हुई है अंजान
नगरपालिका में जनता ने भाजपा पर विश्वास जताते हुए । भाजपा पार्षदों को बम्पर वोटों से चुनाव जिताया है । जनता को उम्मीद थी कि नगर सरकार के रूप में भाजपा अच्छा काम करेगी । लेकिन नपा की वर्तमान स्थितियों को देखकर लगता है भाजपा जिला पदाधिकारी सब जानकर भी अंजान बने हुए है । इसका सीधा असर विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा ।

बड़ा भ्रष्ट है सीएमओ सुधीर सिंह
सुधीर सिंह नगरपरिषद स्तर का सीएमओ है, इसको ए क्लास की नगरपालिका मन्दसौर में जब से पदस्थ किया तब से सुधीर सिंह भ्रष्टाचार के एक से एक कीर्तिमान स्थापित करने में लगे है । आते ही सुधीर सिंह ने निजी अस्पतालों की अवैध बिल्डिंगों को भवन पूर्णतया प्रमाण पत्र जारी कर दिए थे, उसके बाद इनके ऊपर चहेते ठेकेदार को काम देने, तय मूल्य से अधिक कीमत पर वाहन खरीदी सहित कई आरोप लगे जो समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हुए । सुधीर सिंह ने सबसे बड़ा कांड तो एक कॉलोनी का नामान्तरण स्वीकृत करने के लिए पीआईसी में किया है । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम के नियमों को बला ए ताक पर रखकर कॉलोनाइजर को फायदा पहुँचा दिया । ये काम बिना शिष्टाचार के तो सम्भव नही हुआ होगा । क्योंकि जनता के अविवादित नामान्तरण प्रकरण नही हो रहे और कॉलोनाइजरो के नामान्तरण पीआईसी सदस्यों की अनुपस्थिति के बाद भी हो रहे है । ये कैसे सम्भव है ?
सीएमओ सुधीर सिंह की नपा में आमद के बाद नगरपालिका क्षेत्र में अवैध निर्माणों की तो मानो बाढ़ आ गई । आजकल निर्माणकर्ता इंजीनियर, पटवारी नही सीधे सीएमओ से सांठगांठ करके अवैध निर्माण कर रहे है । नगर में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हो रहे इस बात को स्वयं सीएमओ ने एक अखबार को दिए वक्तव्य में माना था।

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Author: Admin

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