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आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को पटखनी देने के लिए बूथ स्तर तक कांग्रेस कर रही टीम तैयार

जिलाध्यक्ष विपिन जैन के नेतृत्व में जिले की चारों विधानसभा सीटों पर चुनाव जितने की रणनीति पर काम कर रही कांग्रेस की जम्बो कार्यकारिणी

दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल

पिछले कई चुनावों में चुनाव प्रबंधन के मामले में भाजपा ने बूथ और पन्ना प्रमुख तक पकड़ बनाई और इसी के सहारे भाजपा चुनाव भी जीतती आई है । भाजपा टीम वर्क के मामले में कांग्रेस से कई गुना आगे है जबकि कांग्रेस के पोलिंग बूथों पर कार्यकर्ता तक दिखाई नही देते है । भाजपा की चुनाव जीतने की जो बूथ लेवल तक कि रणनीति है उस पर इस बार कांग्रेस भी काम कर रही है । जिले में विपिन जैन के जिलाध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस ने संगठनात्मक रूप से अपनी पकड़ मजबूत की है । इस बार के चुनाव में कांग्रेस ही नही बल्कि इसकी अन्य इकाइयां जैसे यूथ कांग्रेस, महिला कांग्रेस और एनएसयूआई, सेवादल, अजा मोर्चा भी सक्रिय दिखाई दे रही है । जिले में आये दिन कांग्रेस के धरने, प्रदर्शन और आंदोलन शुरू हो गए है । आगामी चुनावों के लिए कांग्रेस की अंदरूनी रणनीति पर योगेश पोरवाल की विशेष रिपोर्ट…

मन्दसौर । जिले में कांग्रेस की सक्रियता पिछले चुनावों के मुकाबले इस बार अधिक है । जब से कांग्रेस जिलाध्यक्ष की कमान विपिन जैन के हाथों में आई है वे कांग्रेस को मजबूत करने में कोई कसर नही छोड़ रहे है । एक गांव के सरपंच रहे विपिन जैन जब जिलाध्यक्ष बने थे तब कई लोगों के मन मे संशय था कि ये जिला सम्भाल पाएंगे या फिर किसी के इशारों पर काम करते रहेंगे ।
लेकिन विपिन जैन की रणनीति का परिणाम ये रहा कि बहुत कम समय मे कांग्रेस जिले में मजबूत स्थिति में आ गई । जिलाध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस की जम्बो जिला कार्यकारिणी बनाकर विपिन जैन ने सबको काम करने का मौका दिया है और शायद इसी का परिणाम है कि जिले में कांग्रेस आज अच्छी स्थिति में आ गई है ।
कांग्रेस संगठनात्मक रूप से भाजपा की कभी बराबरी नही कर पाई लेकिन इस बार जिलाध्यक्ष ने आगामी विधानसभा को लेकर जो रणनीति तैयार की है अगर वो धरातल पर उतरी और उसके हिसाब से काम हुआ तो निश्चित की भाजपा को कड़ी टक्कर मिलने की संभावना है ।
भाजपा के बूथ लेवल और पन्ना प्रमुखों की तरह ही कांग्रेस इस बार बूथ लेवल कमेटी, ग्राम पंचायत प्रभारी, नगर अध्यक्ष, वार्ड अध्यक्ष, वार्ड समन्वयक और 10 लोगों की बूथ लेवल कमेटी गांव-गांव बनाकर हर बूथ तक पकड़ बनाने जा रही है । बूथ लेवल कमेटी में 10 सदस्य रहेंगे जो कांग्रेस के पदाधिकारी होंगे और उसी बूथ के होंगे । इसके अलावा ब्लॉक, मंडलम और सेक्टर स्तर पर पहले से ही कांग्रेस काम करती आई है । हर बार कांग्रेस में उम्मीदवार चुनाव लड़ते आए है लेकिन इस बार कांग्रेस की जो मैदानी मेहनत है उससे ऐसा प्रतीत होता है कि चुनाव संगठन लड़ेगा ।

कमलनाथ सरकार का कार्यकाल और नए वादों का भी रहेगा असर
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पास मतदाताओं के बीच जगह बनाने के लिए कोई विशेष रणनीति और मुद्दे नही थे । किंतु 18 महीने की कमलनाथ सरकार में एंटी माफ़िया, किसान कर्जमाफी जैसे अनेक मुद्दों पर हुए काम को लेकर इस बार कांग्रेस मैदान में उतर चुकी है । पुराने कार्यकाल के साथ साथ इस बार नारी सम्मान, 500 रुपए में रसोई गैस, पुरानी पेंशन, किसान कर्जमाफी, 100 यूनिट बिजली माफ जैसे वादे भी इस बार कांग्रेस को बढ़त दिलाएंगे ।

टिकट वितरण के बाद कांग्रेस में गुटबाज़ी रहती है बड़ी चुनौती
पिछले कई चुनावो का इतिहास रहा है कांग्रेस उम्मीदवार को गुटबाजी के कारण कांग्रेसी ही चुनाव हरवा देते है । टिकट वितरण होने तक कांग्रेसी एकजुट दिखाई देते है लेकिन जैसे ही टिकट की घोषणा होती है । कांग्रेस में टिकट के दावेदार ही पार्टी उम्मीदवार हरवाने का षड्यंत्र रचना शुरू कर देते है । कई बार तो निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़कर पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार को चुनाव हरवा देते है । पिछले चुनाव में मल्हारगढ़ और भानपुरा विधानसभा की सीटें कांग्रेस को गुटबाजी के कारण ही गंवानी पड़ी । चुनाव हारने के बाद खुलकर एक दूसरे के ऊपर आरोप प्रत्यारोप भी चलते है लेकिन फिर पाँच साल बाद चुनाव के समय वही समस्या कांग्रेस के सामने मुहं उठाकर खड़ी हो जाती है । कांग्रेस को अगर चुनाव लड़कर जितना है तो सबसे पहले गुटबाज़ी से निपटना होगा ।

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Author: Admin

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