Dashpurdisha

Search
Close this search box.

Follow Us:

क्षेत्र का ऐतिहासिक धार्मिक और पर्यटक स्थल है तक्षकेश्वर (ताखाजी)

दशपुर दिशा । अनिल नाहर

राजा तक्षक और धनवंतरी का स्थान है ताखाजी

भानपुरा । मंदसौर जिले के भानपुरा से लगभग 22 किलोमीटर दूर नावली गाँव के पास अरावली की सुरम्यभूमि में स्थित प्राकृतिक छटा से परिपूर्ण यह स्थान तक्षकेश्वर, ताखा ज़ी, ताखेश्वरजी आदि नामों से प्रसिद्ध है ।
यहाँ एक प्राकृतिक भव्य जलप्रपात और पवित्र और गहरा जलकुंड है । यह नागो के राजा तक्षक और आयुर्वेद के जनक धनवंतरी का स्थान हैं । यहाँ 12 वीं शताब्दी में बना हुआ एक पौराणिक व ऐतिहासिक ताखाज़ी का मंदिर है । प्रत्येक वर्ष वैशाख महीने की पूर्णिमा को यहाँ मेले का आयोजन होता है । इस स्थान का महत्व पुराणों में भी देखने को मिलता है । आयुर्वेद के जनक धनवंतरी का स्थान होने से यहाँ प्राकृतिक संसाधन और बेशकीमती दुर्लभ जड़ी बूटियों का भंडार है । कई जानकार लोग यहाँ आते हैं । पहले धनवंतरीजी की पूजा करके फिर बूटियों की खोज कर ले जाते है । यहाँ ऊपर पहाड़ में बने रॉक शेल्टर में हजारों साल पुरानी शैल चित्र भी पाए गए हैं । जो यह दर्शाता है कि प्रागैतिहासिक काल में यहां कभी आदि मानव का निवास था ।

पुराणों मैं भी है ताखाजी का जिक्र

पांडवो के वंशज व अर्जुन के पौत्र और अभिमन्यु और उत्तरा के पुत्र राजा परीक्षित जंगल में भटकते हुवे प्यास से व्याकुल होकर ऋषि के आश्रम पहुंचे हैं व पानी मांगते हैं, लेकिन ऋषि ध्यान में तन्मय होने के कारण राजा कि बात सुन नहीं पाते हैं । जिससे परीक्षित क्रोधित होकर पास में मरे हुए सर्प को ऋषि के गले में डाल देते हैं । जब ऋषि पुत्र श्रंगी आकर दृश्य देखते हैं तो क्रोध के वशीभूत होकर परीक्षित को श्राप दे देते हैं कि 7 दिन में तक्षक नाग के काटने से तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी । इस पर राजा परीक्षित 7 दिन के लिए अपने आप को सुरक्षित करने की कोशिश करते हैं । अग्रिम उपचार हेतु वैद्यराज धनवंतरी जी जिनको देखने मात्र से सर्प दंश ठीक होने का वरदान होता है उनको बुलवा भेजते हैं । जब तक्षक को इस बारे में पता चलता है तो धनवंतरी जी की परीक्षा लेने के लिए यहां आते हैं और एक पेड़ पर अपना विष डालते हैं कुछ देर बाद वह पेड़ सूख जाता है । धनवन्तरि जी उस पेड़ की तरफ देखते हैं और उनके देखने से पेड़ वापस हरा भरा हो जाता है । अब तक्षक को विश्वास हो जाता है कि धनवंतरी जी राजा परीक्षित को बचाने में सफल हो जाएंगे । उनको रोकने के लिए तक्षक धन्वंतरि जी के मार्ग में एक सोने की छड़ी बनकर गिर जाते है । धनवंतरी जी रास्ते में पड़ी छड़ी को उठा लेते हैं । कुछ दूर चलने पर धनवंतरी जी अपनी पीठ को उस छड़ी से खुजलाते हैं,और उसी समय छड़ी सर्प बन कर धनवंतरी जी को काट लेती है । धनवन्तरि जी अपनी पीठ को आंखों से देख नहीं पाने की वजह से उनकी मृत्यु हो जाती है । माना जाता है यह वही स्थान है । बाद में नागराज तक्षक भी यहीं निवास करने लग जाते हैं ।
दसवीं शताब्दी में बने इस मंदिर में नागों राजा तक्षक की एक प्रतिमा है, जिसमें ऊपर से रक्षा करने वाले सात सर्प की आकृति वाली प्रतिमा साथ में उनके पुत्र व पत्नी को दर्शाया गया है और हाथ में एक नरमुंड दिखाया गया है । तक्षकेश्वर महादेव मंदिर जहा महादेव विराजमान है ।

ताखाजी कैसे जा सकते है

भानपुरा मालवा मध्यप्रदेश मंदसौर जिले का हिस्सा है जो राजस्थान झालावाड़ और कोटा जिले से सटा हुआ है । संबंधित रेलवे स्टेशन भवानीमंडी (दिल्ली मुंबई रेल मार्ग) जो कि 20 किलोमीटर है और रामगंजमंडी जो कि 35 किलोमीटर पड़ता है । यहाँ से बस मार्ग द्वारा भानपुरा आसानी से दूर जा सकता है और भानपुरा से व्यक्तिगत वाहन बाइक या कार द्वारा ताखाजी तक जा सकते हैं ।

Admin
Author: Admin

Spread the love

यह भी पढ़ें

टॉप स्टोरीज