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सीएम की नागदा को जिला बनाने की घोषणा के बाद जावरा में मचा हुआ हड़कम्प

◆मध्यप्रदेश संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष भरत बैरागी ने कहा जावरा को जिला बनाने के लिए करेंगे प्रयास
◆ताल के प्रतिनिधि मंडल ने गत दिवस ताल को नागदा जिले में शामिल न किये जाने की मांग को लेकर दिया था जावरा विधायक को ज्ञापन

दशपुर दिशा । दीपक सोनी
जावरा । जब नागदा को जिला बनाने की घोषणा हुई तो जावरा की मांग को बड़ा झटका लगा । लेकिन आमजन में उम्मीद अभी भी कायम है । चुनावी वर्ष में यह सबसे बड़ा मुद्दा बनेगा ।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को नागदा को जिला बनाने की घोषणा की । उसके बाद जावरा शहर में हडक़ंप मच गया है । राजनीति गलियारों से लेकर शहर के चौक-चौराहों के साथ हर ओर सिर्फ जावरा को जिला बनाने के मुद्दें की ही चर्चा है । सोशल मीडिया पर जावरा को जिला नहीं बनाए जाने के मामले ने तूल पकड़ रखा है । सोशल मीडिया पर लोगों ने कटाक्ष भी किया, लेकिन सीएम की घोषणा और विभिन्न परिस्थितियों को देखें तो जावरा का दावा आज भी जिला बनने के लिए मजबूत स्थिति में है । अगस्त- 2013 में मुख्यमंत्री जब जन आशीर्वाद यात्रा लेकर जावरा पहुंचे थे तो उन्होंने मंडी स्थित आम सभा में भरोसा दिया था कि जावरा को जिला बनाएंगे ।
यहां यह बता दे कि नागदा जिला बन गया और आलोट, ताल उसमें मिल जाएंगे तो फिर जावरा जिला नहीं बन पाएगा । इधर चुनावी साल में सबसे बड़ी तहसील की जिले की मांग और यह सौगात मिलने की आस हर किसी के मन में लगी है ।
इसी कड़ी में जहां विधायक व अन्य जनप्रतिनिधि जावरा को जिला बनाने की मांग कर चुके हैं वहीं अब जावरा निवासी मप्र के केबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष भरत बैरागी ने भी जावरा को जिला बनाने को लेकर प्रयास करने की बात कही हैं । मप्र संस्कृत संस्थान के चैयरमेन व मप्र योग आयोग के उपाध्यक्ष भरत बैरागी शनिवार को जावरा प्रवास पर थे । यहां उन्होंने चर्चा में बताया जावरा हर तरह से जिला बनने के योग्य हैं और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी ये विषय जानकारी में हैं । सरकार भी चाहती हैं विकेंद्रीकरण व्यवस्था रहे ताकि विकास ज्यादा हो सके और इसी नीति पर सरकार काम भी कर रही हैं ।
आपने कहा कि जावरा को जिला बनने के सपने संजोए बैठे लोग मायूस हो गए कि अब जावरा जिला बनना संभव नहीं । सोशल मीडिया पर लोगों ने कटाक्ष किए लेकिन सीएम की घोषणा और विभिन्न परिस्थितियां देखें तो जावरा का दावा आज भी मजबूत है । नागदा में तो नेताओं के साथ ही जिले का मुद्दा वहां की जनता का मुद्दा बन गया था, और सबने एक साथ ताकत दिखाई तो सीएम को घोषणा करना पड़ी । जबकि जावरा में ये केवल नेताओं तक सीमित रहा । यहां जनता ने ताकत नहीं दिखाई इसलिए हमारी मांग अधूरी है । जैसे सीएम आने के एक दिन पहले पूरा नागदा बंद रहा गांधीवादी तरीके से कोई बड़ा संदेश यहां की जनता भी देती तो शायद संघर्ष लंबा नहीं होता ।

इसलिए मजबूत है जावरा को जिला बनाने का दावा
जावरा सड़क परिवहन मामले में जंक्शन है । अब दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की कनेक्टिविटी भी मिल गई । जावरा -रतलाम मुख्य व्यापारिक केंद्र है। रेल लाइन दोहरीकरण हो रहा । भविष्य में यहां ताल होकर आलोट तक दिल्ली-मुंबई ट्रैक से नई लाइन डलना है । जिला स्तर की कई सुविधाएं है । जिला एवं सत्र न्यायाधीश समेत 9 न्यायालय है । हुसैन टेकरी, दादावाड़ी, अष्टापद तीर्थ, जागनाथ महादेव मंदिर, रोग्यादेवी व अंबे माता मंदिर, अबु सईद दरगाह, लक्ष्मी मंदिर जैसे धर्म स्थल है ।
उल्लेखनीय है कि जावरा में नए मास्टर प्लान में जावरा का निवेश क्षेत्र बढ़ाकर 93.38 वर्ग किमी किया है । प्रदेश में तहसील स्तर पर एकमात्र जावरा में सर्वसुविधा युक्त 150 बेडेड अस्पताल है। 16 बीघा भूमि खाली, जहां अन्य सुविधा जुटा सकते एशिया की ए ग्रेड मंडी है । रजिस्ट्रार व मंडी से सालाना 45 करोड़ राजस्व सरकार को मिल रहा है । 1934 में स्थापित देश की पहली शुगरमिल जो 2000 में बंद हुई, वहां 42 करोड़ से नया बहु उत्पाद उद्योग केंद्र बन रहा है । कृषि विज्ञान केंद्र, मॉडल स्कूल, जिले का दूसरा बड़ा कॉलेज, सीएम राइज स्कूल, आईटीआई है । केंद्रीय स्कूल प्रस्तावित है ।

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Author: Admin

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